फर्रुखाबाद। गम का महीना मोहर्रम की पहली मजलिस में मौलाना सदाकत हुसैन सैंथली ने कहा कि इस्लामिक इतिहास की सबसे बड़ी घटना मोहर्रम है। यहां हजरत फातिमा को भी याद किया गया। मोहर्रम की घटना जब याद आती है, तो दिल रो पड़ता है।
गुरुवार को चांद का दीदार ही गम का महीना मोहर्रम शुरू हो गया। पहली मजलिस हजरत फातिमा की याद में बूरा वाली गली में की गई। इसमें बड़ी संख्या में शिया मुस्लिम मौजूद रहे। शिया धर्मगुरू मौलाना सदाकत हुसैन सैंथली ने कहा कि मोहर्रम की पहली तारीख को मुसलमानों के दूसरे खलीफा अमीरुल मोमिनीन हजरत सैयदना उमर रदियल्लाहु अन्हु की शहादत हुई।
इसी महीने में यजीद नाम के एक जालिम बादशाह ने पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत सैयदना इमाम हुसैन रदियल्लाहु अन्हु व उनके साथियों को कर्बला के मैदान में शहीद कर दिया था। मौलाना ने बताया कि माह-ए-मोहर्रम शुरू होते ही मस्जिदों व घरों में कर्बला के शहीदों की याद में महफिल व मजलिस शुरू हो चुकी हैं। इमामबाड़ा में तैयारियां चल रही हैं। बूरावाली गली, मादारबाड़ी, घेरशामू खां, भीकमपुरा, बजरिया, मस्जिद तल्ला, असगर रोड आदि स्थानों से चांद की दो, तीन, चार, छह, सात, आठ व 10 मोहर्रम को जुलूस निकाले जाएंगे।