फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Farrukhabad News: खतरे के नीचे रह रहे 50 से अधिक परिवार

विज्ञापन
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। नगर पालिका ने तहसील भवन के नीचे बने 26 मकान मालिकों को नोटिस भले ही दिए हों, मगर टीले के चारों तरफ 50 से अधिक ऐसे मकान हैं, जिन पर मौत हमेशा मंडराती रहती है। अवैध ढंग से बिना नक्शे के बने इन मकानों की न तो निगरानी हुई और न इन पर कोई ठोस कार्रवाई हुई। इसके चलते टीले के नीचे एक बड़ी बस्ती ने अपना रूप ले लिया। आलम यह है कि 50-60 साल पहले आसपास बिना बस्ती वाली ढलान जैसा दिखने वाला टीला आज 50-50 फीट ऊंची खतरनाक खाई में तब्दील हो गया।
विज्ञापन

दरअसल, जिस टीले पर तहसील भवन बना है वह धंस गया था। इससे भवन की दीवारों में दरारें आई थीं। वहीं तहसील व नगर पालिका दफ्तर जिस टीले पर बने हैं, भूलेख दस्तावेजों में इसका बड़ा भूभाग दर्ज है। यह टीला चिलसरा रोड रकाबगंज खुर्द से शुरू होकर, छोटी कांशीराम कालोनी, अस्तबल तराई, मऊदरवाजा थाने के सामने होते हुए चिलसरा रोड तिराहे तक है। मौजूदा समय में टीले पर खड़े होने पर 50-50 फीट की खाई दिखती है। टीले के चारों तरफ बिल्कुल सटाकर 50 से अधिक मकान बने हैं। सबसे अधिक जोखिम रकाबगंंज खुर्द और मऊदरवाजा थाने के सामने वाले हिस्से का है । यहां टीले पर खड़े होने से नीचे गहरा खाई दिखती है। इस इलाके में अगर टील धंसा तो बड़ा हादसा हो सकता है। तीन साल पहले नगर पालिका पानी की टंकी के पीछे एक मकान का काफी हिस्सा नीचे बंद मकान पर गिर गया था। उस वक्त हादसा होने से बचा। मौजूदा समय में अस्तबल तराई की तरफ भी लोग टीले के नीचे मकान बनाने में लगे हैं।
-
आहिस्ते-आहिस्ते बनती रहीं इमारतें, खतरनाक होता गया टीला
फोटो- 33,नवाब कासिम हुसैन बंगश
मऊदरवाजा थाने के पास निवासी नवाब कासिम हुसैन खां बंगश 78 साल के हैं। बताया कि बचपन में टीले के चारों ओर कोई मकान नहीं था। चिलसरा रोड पर उतरते ही पूर्व की ओर दो-चार कच्चे मकान हुआ करते थे। वह अपने वालिद के साथ आते-जाते थे, तो टीले चारों ओर सीधी खाई कहीं नहीं थी। थाने के सामने एक भी दुकान व मकान नहीं हुआ करते थे। उनके देखते-देखते कागजों में जालसाजी करके कब्जा होता रहा।
विज्ञापन

फोटो-34, तुलाराम यादव
मोहल्ला दाउद खां निवासी 91 साल के तुलाराम यादव कहते हैं कि यह किसी प्राचीन महल का टीला था। चारों तरफ कोई बस्ती नहीं थी। मऊदरवाजा थाना भी उनके सामने बना। टीले पर चारों तरफ कहीं से भी चढ़ा जा सकता था। अब लोगों ने मिट्टी खोद-खोद कर मकान बना लिए। बस्ती उनके सामने बसी है। कभी बड़ी झाड़ियां भी हुआ करती थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें