फर्रुखाबाद। फिक्स बिल पर मनमानी बिजली खर्च करने वाले विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों पर भी बिल का बोझ बढ़ेगा। अब वह मुफ्त में एसी का लुत्फ नहीं ले पाएंगे। आवासों पर मीटर लगाकर आम उपभोक्ता की तरह उन्हें भी यूनिट के हिसाब से बिल अदा करना होगा।
जनपद में बिजली विभाग में अधिकारियों सहित कुल 172 स्थाई कर्मचारी हैं। जबकि 528 कर्मचारी आउटसोर्स पर तैनात हैं। नियामक आयोग से स्थाई कर्मचारियों को बिजली बिल में राहत मिलती थी। घर में बिजली का खर्च कितना भी हो, लेकिन अधिकारी के वेतन से 1141 रुपये, अवर अभियंता के वेतन से 888 रुपये, लिपिक वर्ग से 518 व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के वेतन से 425 रुपये प्रति माह कट रहा है। अधिकांश के घरों में एसी, वाशिंग मशीन आदि अधिक बिजली खपत वाले उपकरण हैं। बिजली कितनी भी खर्च हो, बिल उतना ही कटता है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी यही सुविधा मिल रही है। वहीं अधिकांश आउटसोर्स कर्मचारी तो सीधे कटिया डालकर बिजली का उपभोग कर रहे हैं। मुफ्त की बिजली से एसी का जमकर लुत्फ उठा रहे हैं।
अब बिजली विभाग के नियामक आयोग ने अधिकारी व कर्मचारियों को भी राहत पर बिजली न देने का निर्णय ले लिया है। इससे सभी अधिकारी व कर्मचारियों के आवासों पर मीटर लगाने के आदेश जारी कर दिए गए। यूनिट के हिसाब से बिल देने पर कर्मचारियों को जेब ढीली करनी पड़ेगी। इससे बिजली बिल पर चार गुना से भी अधिक खर्च होने का अनुमान है। यदि सख्ती से मीटर लगाए गए तो आउटसोर्स कर्मियों को एसी का हिसाब चुकता करना काफी महंगा पड़ेगा।
अधीक्षण अभियंता विवेक अस्थाना ने बताया कि शासन से अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए एलएमवी-10 की विधा समाप्त कर दी गई है। इससे अधिकारी व कर्मचारियों के आवासों पर शीघ्र ही मीटर लगवाकर आम उपभोक्ताओं की एलएमवी-1 विधा के कनेक्शन पर यूनिट रेट के हिसाब से बिल जमा कराया जाएगा।
विद्युत विभाग के नियामक आयोग ने अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए लागू एलएमवी-10 विधा हटाकर बिल पर राहत समाप्त कर दी है। इससे कर्मचारियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि सरकार बिजली कर्मचारियों को एक ही सुविधा दे रही थी, वह भी छीन ली। इलाज के लिए कैशलेस सुविधा भी नहीं है।