कमालगंज। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से जंजाली नगला गांव में कटान का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। गांव खाली करने की मुनादी के बाद कुछ परिवारों ने सामान निकालकर घर खाली कर दिया है। कुछ परिवार रहने के लिए जगह मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
कस्बे से दो किलोमीटर की दूरी पर बसे जंजाली नगला गांव को खाली करने की समयसीमा मंगलवार शाम समाप्त हो गई। 28 परिवारों में करीब 10 ने सामान निकालकर दूसरी जगह पहुंचा दिया है। पंचायत घर के पास बसे मोहल्ले के गोपाल का परिवार दोपहर को सामान निकाल रहा था। गोपाल की पत्नी मोहिनी ने बताया कि वह अभी एक खेत में सामान रख रहे हैं। देवी मंदिर तिराहा कट जाने से लोग खेतों से सामान दूसरी जगह पहुंचा रहे हैं।
छीतापुर कपूरापुर गांव में मिलेगी जगह
- छीतापुर कपूरापुर की प्रधान राममूर्ति की देखरेख में नौ मनरेगा श्रमिकों ने पीड़ितों को बसाने के लिए चिह्नित तीन बीघा जमीन में समतलीकरण व मेड़बंदी काम शुरू कर दिया है।
कहां डालें मड़ैया, जमीन मिले तो छोड़ देंगे गांव
- 80 वर्ष की ब्रजरानी ने कहा कि पुरखे भी यहीं रहते थे। चारों बच्चों के हिस्से में चार-चार बीघा खेती थी, वह गंगा में कट गई। गांव के मकान में चारों लड़कों का परिवार रहता है। अब ऐसे में हम कहां मड़ैया डालें। जमीन मिल जाए तो वह तुरंत गांव छोड़ देंगी।
पति का मिला था शव, पारिवारिक लाभ के 30 हजार भी नहीं मिले
- कटान पीड़ित प्रेमवती का दर्द छलक पड़ा। कहा कि उनके पति पुरुषोत्तम हलवाई का काम करते थे। दो साल पहले काम पर जाने के बाद रजीपुर में उनका शव मिला था। पारिवारिक लाभ योजना का फार्म भरा, पर 30 हजार रुपये नहीं मिले। मकान कट जाने से अब वह पांच अन्य परिवारों के साथ चेयरमैन प्रीति माहेश्वरी की बिरिया वाली बगिया में रह रही हैं। गांव के अनिल ने कहा कि कुछ दिन बाद बिरिया बगिया भी कट जाएगी तो कहां जाएंगे।