सातनपुर मंडी में तत्कालीन सचिव के कार्यकाल में करीबी बड़े आढ़तियों के जरिए मंडी शुल्क में करोड़ों का गोलमाल किया गया था।
इस मामले में मंडी सहायक व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी निलंबित चल रहा है। वहींच कर रहे बस्ती के मंडी उपनिदेशक ने घपले की पुष्टि होने पर तत्कालीन मंडी सचिव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई को पत्रावली निदेशक को सौंप दी है।
सातनपुर मंडी में वर्ष 2011 से 2017 के बीच मंडी शुल्क में करोड़ों का खेल किया गया। गेट पास की कार्बन कॉपी पर पेन से लिखकर वजन में भी जमकर हेराफेरी की गई। जांच में दोषी पाए गए गेटपास काटने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अभयप्रताप सिंह व मंडी सहायक श्याम सिंह को जून 2019 में निलंबित कर दिया गया था।
वहीं पूरे प्रकरण की जांच जिला बस्ती व प्रयागराज के मंडी उपनिदेशक को सौंपी गई थी। जांच के दौरान इस अवधि के बीच सातनपुर मंडी से गेटपास, 6आर व 9आर की पूरी डिटेल, आढ़तियों के नाम सहित मिसिंग अभिलेखों की पत्रावली तलब की जा चुकी है।
इसमें आढ़ती भी कार्रवाई के घेरे में हैं। हालांकि प्रकरण में शामिल शातिर आढ़तियों का मंडी से काम बंद होने के बाद वह नई फर्म बनाकर मंडी में फिर से काबिज हो चुके हैं।
जांच कर रहे बस्ती के उपनिदेशक मृत्युंजय सिंह ने बताया कि उनके स्तर से जांच पूरी हो चुकी है। उन्होंने दोषी पाए गए तत्कालीन मंडी सचिव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर जांच आख्या निदेशक को सौंप दी है।
उपनिदेशक कानपुर अजीत कुमार सिंह ने बताया कि जांच अंतिम दौर में है। निदेशक का आदेश मिलते ही अभिलेख गायब करने के मामले में संबंधित कर्मचारी व अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।