फर्रुखाबाद। शहीद कभी नहीं मरता, वह तो कयामत तक जिंदा रहता है। मजलिसे अलविदाई में मौलाना शाहिद रजा रिजवी ने यह बात कही। इस मौके पर मौजूद लोगों ने मातमी माहौल में ताबूतों को रुखसत किया।
रविवार को मोहल्ला घेर शामू खां में इंतिखाब हुसैन ने करबला का जिक्र छेड़ा तो लोगों की आंखें रो पड़ीं। मौलाना ने कहा कि तीन दिन से भूखे प्यासे हुसैन के परिजनों को बड़ी बेरहमी के साथ कत्ल कर दिया गया। मासूमों को भी दुश्मनों ने नहीं बक्शा था। गमजदा माहौल में 14 मासूमों के ताबूत मिले।
ताबूत निकलते ही लोग उनको चूमते और विदा कर देते। इसके बाद चुप ताजिया बरामद किया गया। ताजिए को जायरीनों ने मेहंदीबाग ले जाकर रुखसत किया। मुन्तजिर हुसैन, साबिर जैदी, नावेद अल्वी, आजम जैदी, काजिम जैदी, राजू अल्वी, नफीस हुसैन, सलीम, शादाब जैदी, ताहिर हुसैन, राजा बिल्डर्स, सलीम हैदर, साजिद हुसैन, छोटे नबाव, आफताब हुसैन आदि मौजूद रहे।