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Farrukhabad News: शिवभक्तों की राह में कहीं शूल न बन जाएं उखड़ी गिट्टियां

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फर्रुखाबाद। सावन शुरू होने में अब सिर्फ छह दिन शेष हैं। योगी सरकार कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा करवाती है, लेकिन पांचाल घाट से गंगाजल लेकर लौटने वाले हजारों कांवड़ियों की राह कांटों से भरी रहने वाली है। शुक्रवार को संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में सामने आया कि सबसे प्रमुख कांवड़ मार्ग जगह-जगह उखड़ा पड़ा है। नुकीली गिट्टियां नंगे पैर चलने वाले कांवड़ियों के लिए शूल साबित होंगी। कई स्थानों पर गड्ढे और नाले का गंदा पानी परेशानी को और बढ़ाएंगे। पांचाल घाट के अधिकांश घाटों पर न सुरक्षा की मुकम्मल व्यवस्था है और न ही रोशनी व बैरिकेडिंग की तैयारी पूरी हो सकी है।
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30 जुलाई से सावन शुरू होते ही मध्य प्रदेश के भिंड और मुरैना सहित बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, मैनपुरी, एटा, औरैया आदि जिलों से हजारों शिवभक्त पांचाल घाट पहुंचेंगे। यहां से गंगाजल भरकर श्रद्धालु नंगे पैर शिवालयों तक पैदल यात्रा करेंगे लेकिन जिन रास्तों से होकर उन्हें गुजरना है, वहां जगह-जगह सड़क उखड़ी पड़ी है। बारिश के दौरान सड़क पर गंदा पानी भर जाने से हालात और भी चुनौतीपूर्ण हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था कहीं दिख नहीं रही है।
गंगा के उत्तर और दक्षिणी हिस्से में करीब 70 घाट (गंगा पुत्रों के स्थान) हैं। उत्तर दिशा के पक्के घाटों पर लगी स्थायी बैरिकेडिंग गंगा का जलस्तर बढ़ने से पानी में डूब चुकी है, जबकि दक्षिण दिशा के करीब 40 घाटों पर अब तक बैरिकेडिंग, प्रकाश और ध्वनि व्यवस्था नहीं की गई है। पंडा समिति के अध्यक्ष मनोज औदीच्य ने प्रशासन से जल्द सुरक्षा, प्रकाश और बैरिकेडिंग की व्यवस्था कराने की मांग की है। बताया कि घाटों पर पंडों की ओर से लगाई जाने वाली बैरिकेडिंग को नाविक तोड़ देते हैं।
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लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता अशोक कुमार यादव ने बताया कि शनिवार को ही वह सड़क को दिखवाएंगे। जहां भी मरम्मत की आवश्यकता होगी, वहां काम कराया जाएगा।
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इन्सेट
बिखरी गिट्टियां लेंगी शिवभक्तों की परीक्षा
इटावा-बरेली हाईवे स्थित पांचाल घाट चौराहे पर सड़क की ऊपरी परत उखड़ चुकी है। जगह-जगह गहरे गड्ढों से नुकीली गिट्टियां बाहर निकल आई हैं। बरसात में यहां नाले का गंदा पानी भी भर जाता है। ऐसे में गंगाजल लेकर लौटने वाले कांवड़ियों को नंगे पैर इन्हीं रास्तों से गुजरना होगा। कादरीगेट से पांचाल घाट तक का मार्ग भी कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है।
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70 घाट, लेकिन अधूरी तैयारियां
पांचाल घाट पर हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन इस बार घाटों पर तैयारियां अधूरी हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने से कई स्थानों की बैरिकेडिंग पानी में डूब गई है, जबकि करीब 40 घाटों पर अभी तक सुरक्षा घेरा, प्रकाश और साउंड सिस्टम की व्यवस्था नहीं हो सकी है। पंडा समिति का कहना है कि कांवड़ मेला पूरी रात चलता है। यदि समय रहते व्यवस्थाएं पूरी नहीं हुईं तो श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों के साथ सुरक्षा संबंधी जोखिम भी उठाना पड़ सकता है।
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