स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग भले ही चाक चौबंद व्यवस्था करने का
दावा कर रहा हो लेकिन हकीकत जुदा है। लोहिया अस्पताल में स्वाइन फ्लू की
जांच के लिए किट ही नहीं हैं। जांच किट न होने पर दिल्ली से आए एक मरीज ने
अस्पताल में हंगामा किया।
शासन ने स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए सीएमओ
को निर्देश दिए हैं। मरीजों के लिए अलग से वार्ड बनाने के लिए कहा गया है।
सीएमओ डा. राकेश कुमार के निर्देश पर लोहिया अस्पताल के सीएमएस डा. रतन
कुमार ने अस्पताल के एक वार्ड का आरक्षित कर दिया है। इस आरक्षित आइसोलेशन
वार्ड में छह बेड हैं।
स्वाइन फ्लू के लिए बने इस वार्ड में रोग की जांच के
लिए न तो किटें हैं और न ही वैक्सीन। असपताल में टेमीफ्लू गोलियां और
विभाग के लोगों के पहनने के लिए ही किट हैं। स्वास्थ्य विभाग इस बीमारी से
निपटने के लिए तैयारी दावा कर रहा है। अस्पताल की हकीकत कुछ और ही है।
अस्पताल प्रशासन लोगों को गुमराह कर अपनी पीठ ठाेंक रहा है।
स्वास्थ्य
विभाग की हकीकत शुक्रवार को खुल भी गई। कायमगंज के गांव लहरा निवासी युवक
कीर्तन दिल्ली में काम करता है। तीन दिन पहले वह अपने घर आया था। तबीयत
खराब होने पर उसका इलाज चल रहा था। सुधार न होने पर शुक्रवार की सुबह वह
लोहिया अस्पताल में स्वाइन फ्लू की आशंका पर जांच के लिए पहुंचा। यहां
बताया गया कि आपातकालीन कक्ष में जांच किट रखी हुई है।
जब वह आपातकालीन में
आया तो पता चला कि वहां किट नहीं है। इस पर युवक ने हंगामा किया। उसका
कहना था कि इस अस्पताल में जब स्वाइन फ्लू के जांच किट नहीं है तो फिर जिले
में कहां होगी। मालूम हो कि जांच के बाद ही टेमीफ्लू की गोलियां दी जाती
है। जब जांच किट नहीं है तो गोलियां रखी ही रहेंगी।
लोकल खरीददारी के निर्देश
सीएमओ
डाक्टर राकेश कुमार ने बताया कि सीएमएस को किट और वैक्सीन की स्थानीय
बाजार से खरीददारी के निर्देश दिए गए हैं। अभी तक कोई भी मरीज जिले में
नहीं मिला है। फिर भी सतर्कता बरती जा रही है।