फर्रुखाबाद। लोहिया पुरुष अस्पताल और फतेहगढ़ सीएचसी (एल-2 अस्पताल) में लगे 15 वेंटिलेटर शो पीस बने हुए हैं। इनका प्रयोग अस्पताल प्रबंधन सिर्फ मॉकड्रिल में अपनी साख बचाने के लिए करता है। किसी भी मरीज को वेंटीलेटर की सुविधा का फायदा नहीं मिल रहा।
ओपीडी और इमरजेंसी से रोजाना मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत बताकर रेफर किया जाता है। जबकि वेंटिलेटर के संचालन की जिम्मेदारी निभाने में सक्षम एनीस्थीसिया के डॉक्टर की तैनाती भी है। इसके बाद भी दोनों अस्पताल के वार्डों में वेंटिलेटर ताले में बंद हैं। बताया जाता है कि पूरा स्टाफ न होने के कारण वेंटिलेटरों का संचालन नहीं हो पा रहा है।
पीएम केयर फंड से वर्ष 2020 में 15 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे। मंशा थी कि कोरोना लहर में गंभीर मरीजों को जीवन प्रदान किया जा सके। लोहिया अस्पताल के पीकू वार्ड में 10 और फतेहगढ़ के एल-2 अस्पताल में पांच वेंटिलेटर लगाए गए। इनका प्रयोग कभी किसी मरीज की जान बचाने में नहीं किया जा सका।
स्थिति यह है कि ओपीडी में औसतन रोजाना दो हृदयरोगियों और इमरजेंसी से तीन-चार मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत होने की बात कहकर हैलट व सैफई रेफर कर दिया जाता है।
जबकि अस्पताल में 10 वेंटीलेटर हैं और एनीस्थीसिया के डॉ. अमिताभ चौहान की भी तैनाती है। फिर भी इन वेंटिलेटर प्रयोग में नहीं लाए जाते। हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज पांडेय ने बताया कि हृदयरोगी के लिए कार्डियो आईसीयू की जरूरत होती है। वह सुविधा यहां नहीं है।
लोहिया पुरुष अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगने के बाद सभी बेडों पर ऑक्सीजन सुविधा उपलब्ध करा दी गई। अस्पताल के दूसरी मंजिल पर बने टीबी वार्ड, जनरल वार्ड, आइसोलेशन वार्ड आदि में ऑक्सीजन लाइनों में फ्लोमीटर लगे हैं, मगर उनसे ऑक्सीजन मॉस्क गायब हैं। वार्डों के अंदर सफाई करने की जरूरत भी नहीं समझी गई। कई गद्दे फटे हैं और वार्डों में बेड भी कम हैं। जबकि कानपुर मंडल के आयुक्त का गुरुवार को निरीक्षण होना है।
एडीएम सुभाष चंद्र प्रजापति के निरीक्षण में आदेश के बाद इमरजेंसी हॉल में लगे हेल्थ एटीएम का मरीजों को फायदा मिलने लगा। मंगलवार देर शाम शुरू होने के बाद बुधवार सुबह से ही मरीजों की लाइन लगी रही। दोपहर 12 बजे तक 25 लोगों ने जांच कराई।
‘वेंटिलेटर संचालन के लिए स्टाफ की जरूरत होती है। इसकी कमी को देखते हुए कई बार शासन स्तर पर पत्राचार किया जा चुका है। रही बात, फ्लोमीटर में मॉस्क न होना और गंदगी की तो वह खुद दिखवाकर व्यवस्था दुरुस्त कराएंगे।’
-डॉ बहीदुल हक, प्रभारी सीएमएस लोहिया पुरुष अस्पताल।
फर्रुखाबाद। वेंटिलेटर वार्ड के 24 घंटे संचालन में तीन डॉक्टर, तीन स्टाफ नर्स, तीन स्वीपर और चार वार्डब्वॉय की जरूरत होती है। यह कर्मचारी भी वेंटिलेटर संचालन के लिए प्रशिक्षित होने चाहिए। पर वेंटिलेटर वार्ड में काम करने के लिए कोई प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं है।(संवाद)
निजी अस्पतालों में लगे वेंटिलेटर बेड का 24 घंटे में 12 हजार रुपये खर्च आता है। मरीजों को दवाइयों का अलग से भुगतान करना होता है। लोहिया अस्पताल के गंभीर मरीज सैफई व कानपुर मेडिकल कालेजों के लिए रेफर किए जाते। बड़ी संख्या में लोग मजबूरन निजी अस्पतालों में मरीजों को भर्ती कर देते हैं।