फर्रुखाबाद। वकील की हत्या में दोषी दो चचेरे भाइयों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। दो लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है।
शहर कोतवाली के मोहल्ला बजरिया जाफर निवासी अधिवक्ता अरुण कुमार मिश्रा (31) की मेरापुर थाना क्षेत्र के गांव अमरौली के नजदीक 21 फरवरी 2008 को गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। साथ में मौजूद दोस्त रामऔतार ने मेरापुर थाने में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इसमें कहा था कि वह अपने चचेरे भाई दिलीप उर्फ नन्हें और दोस्त वकील अरुण कुमार मिश्रा को लेकर बाइक से एटा के अलीगंज थे। रात में लौटते समय अमरौली गांव के पास पांच बदमाशों ने रोक लिया और लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इससे तीनों लोग बाइक से गिर गए थे। एक बदमाश ने अरुण के गोली मार दी थी। उनकी चेन, 8500 रुपये व मोबाइल लूट ले गए।
पुलिस की विवेचना में पता चला कि मुकदमा लिखाने वाले दोस्त रामऔतार ने ही चचेरे भाई दिलीप उर्फ नन्हें व तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर अरुण की हत्या की है। रामऔतार को शक था कि दिलीप के भाई की हत्या में अरुण शामिल थे। इससे वह अरुण से मन ही मन रंजिश मानता था।
पुलिस ने रामऔतार, उसके चचेरे भाई दिलीप उर्फ नन्हें, एटा के नया गांव निवासी नरसिंह, गांव झब्बू सिंह का नगला निवासी सर्वेश और मेरापुर के गांव नौली निवासी विनोद यादव के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार पांडेय ने दलीलें पेश कीं।
सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह ने आरोपी नरसिंह, सर्वेश और विनोद यादव को साक्ष्य के अभाव में 24 अगस्त को दोषमुक्त कर दिया था। वकील के दोस्त रामऔतार और उसके चचेरे भाई दिलीप उर्फ नन्हें को हत्या के जुर्म में दोषी करार दिया था। सोमवार को न्यायाधीश ने दोस्त और उसके चचेरे भाई को सजा व जुर्माने से दंडित किया। जुर्माना वसूल होने पर डेढ़ लाख रुपये वकील की पत्नी सुनीता मिश्रा को देने का आदेश दिया है।