अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अतीकुद्दीन ने सीजेएम कोर्ट से जारी एफआईआर के आदेश को छिपाने के मामले में सेवानिवृत्त कोतवाल और दरोगा को दोषी पाकर दो साल की सजा सुनाई है।
शहर कोतवाली के मोहल्ला छक्का नाजिर कूंचा निवासी सर्वेंद्र कुमार उर्फ इंदू अवस्थी की याचिका पर सीजेएम ने 27 जनवरी 1998 को शहर कोतवाली में तैनात रहे कोतवाल दीवानगिरी और तिकोना चौकी प्रभारी दरोगा केशवराम मिश्र के खिलाफ धारा 147, 342, 323, 504, 506 व 220 के तहत रिपोर्ट लिखने का आदेश दिया था।
यह आदेश 28 जनवरी 1998 में पैरोकार न्यायालय से कोतवाली लेकर आया और जीडी पर दर्ज किया। इसकी जानकारी होने पर कोतवाल दीवानगिरी व दरोगा केशवराम मिश्रा 2 फरवरी 1998 तक कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया। इस आदेश को कोतवाल और दरोगा ने कोतवाली से चुराकर अपने पास रख लिया।
सीजेएम के आदेश के खिलाफ जिला जज की अदालत में 2 फरवरी को आपराधिक निगरानी दाखिल कर दी। इसको लेकर सर्वेंद्र कुमार उर्फ इंदू अवस्थी ने कोर्ट के आदेश को कोतवाली से चोरी करने का आरोप लगाकर कोर्ट में परिवाद दायर किया। इस दौरान दोनों आरोपियों को धारा 379 व 406 आईपीसी के अपराध में तलब किया गय
मुकदमे की सुनवाई के दौरान इंदू अवस्थी की ओर से अधिवक्ता शशिभूषण दीक्षित और संजीव कुमार दुबे ने पैरवी की। इस दौरान कोतवाल और दरोगा सेवानिवृत्त हो गए। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सुनवाई पूरी होने पर सेवानिवृत्त कोतवाल दीवानगिरी और दरोगा केशवराम मिश्र को धारा 406 में दोषी पाकर दो साल की सजा और दो-दो हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया है।