फर्रुखाबाद। स्कूल भवनों में जल संचयन के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट बनाने को करोड़ों रुपये का काम बिना टेंडर व वर्क आर्डर के चहेती फर्मों को दे दिया गया। प्लांट अधूरे पड़े होने के कारण दो साल बाद बी जल संचयन भी नहीं हुआ। इस मामले को जिलाधिकारी ने बीडीओ को पत्र जारी कर ब्योरा तलब किया है।
जिले के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित 1607 स्कूल भवनों में वर्षा का जल संचयन करने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट बनाने का काम गत वर्ष शुरू किया गया। एक प्लांट पर औसतन 60 हजार रुपये खर्च किए गए। करीब 9.50 करोड़ से अधिक रुपये से अधिक का काम लघु सिंचाई विभाग के आधा दर्जन ठेकेदारों को सौंप दिया गया। एमबी की जिम्मेदारी लघु सिंचाई विभाग के जेई अशोक कुमार को दी गई।
इस संबंध में अमर उजाला ने 19 अगस्त के अंक में ‘चहेती फर्मों को बिना टेंडर करोड़ों का काम’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया। इसका जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने संज्ञान लेकर जवाब मांगा है। सर्वाधिक काम कराने वाले इटावा के ठेकेदार का कहना है कि करीब दो करोड़ रुपये रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट के निर्माण में फंसा चुके हैं। भुगतान न मिल पाने से सभी प्लांट अधूरे पड़े। उनके नाम न तो टेंडर है और न ही वर्क आर्डर, सिर्फ एक अधिकारी का आश्वासन है। हरदोई के ठेकेदार का भी भुगतान फंसने से काम अधूरा पड़ा है।
जिलाधिकारी के आदेश पर बीडीओ को पत्र जारी कर टेंडर की प्रक्रिया से लेकर अभी तक के सभी अभिलेख मांगे हैं। इससे अफसरों में खलबली मची है। अब बीडीओ मनरेगा से काम पूरा कराने में जुट गए हैं। नवाबगंज की बीडीओ नजमा सिद्दीकी ने बताया कि मनरेगा से काम पूरा कराया जा रहा है।
मुख्य विकास अधिकारी डा. राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट के निर्माण के संबंध में सभी बीडीओ को पत्र जारी कर विवरण मांगा गया है। बीडीओ से रिपोर्ट मिलते ही जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी।