कमालगंज। यदि आपको को सीएचसी में एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाना है तो सिरिंज साथ लानी पड़ेगी। सीएचसी में वैक्सीन तो है, लेकिन सिरिंज नहीं है। छह माह से ऐसे हालात हैं। मेडिकल स्टोर संचालक भी इसका फायदा उठाकर दो रुपये वाली सिरिंज 10 रुपये में बेच रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर करीब 10 से 15 किमी दूर तक से मरीज इलाज के लिए आते हैं। यहां प्रतिदिन कुत्ता, बिल्ली व बंदर के काटने के करीब 30 मरीज पहुंचते हैं। सुबह आठ बजे से वैक्सीन लगवाने के लिए भीड़ जुटने लगती है। पर्चा बनवाने के बाद जब पीड़ित औषधि वितरण कक्ष में वैक्सीनेटर के पास पहुंचते हैं तो पता चलता है कि सिरिंज बाहर से लानी पड़ेगी।
मजबूरी में लोगों को मेडिकल स्टोर से सिरिंज खरीदकर लानी पड़ती है। इसका फायदा मेडिकल स्टोर संचालक उठा रहे हैं। दो से तीन रुपये में मिलने वाली सीरिंज के लिए सात से 10 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। इससे पीड़ित परेशान होते हैं। सिरिंज लेकर आने के बाद उन्हें लाइन लगानी पड़ती है। सीएचसी पर सिरिंज की समस्या छह माह से है, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
मंगलवार को सीएचसी में रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचे नगरिया गहलवारान निवासी विश्राम सिंह (50) ने बताया कि वह तीसरी डोज लगवाने आए हैं। उन्हें हर बार बाहर सिरिंज बाहर से लानी पड़ी। कस्बा के मोहल्ला शास्त्री नगर निवासी अंकित (16) ने बताया कि वह दूसरी बार वैक्सीन लगवाने आए हैं।
इस बार भी उन्हें बाजार से 10 रुपये की सिरिंज खरीदनी पड़ी। श्रृंगीरामपुर निवासी सर्वेश सिंह (35) ने बताया कि वह लाइन में लग कर जब फार्मासिस्ट के पास पहुंचे तो उन्हें सिरिंज लाने के लिए कहा गया। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अवनींद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने सोमवार को ही चार्ज लिया है। जानकारी कर सीएचसी पर सिरिंज की व्यवस्था कराई जाएगी।
एक इंजेक्शन के लिए चार कतारें
सीएचसी में एंटी रेबीज इंजेक्शन के लिए मरीज को तीन बार कतारें लगानी पड़ती हैं। एक कतार ओपीडी में रजिस्ट्रेशन के लिए, दूसरी ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के लिए और तीसरी कतार लगती है औषधि वितरण कक्ष में इंजेक्शन लगवाने के लिए।
सिरिंज की किल्लत ने मरीजों पर एक और कतार थोप दी है। तीसरी कतार में लगने के बाद जब मरीज काउंटर पर पहुंचता है, तो उसे पता चलता है कि यहां सिरिंज नहीं है। कतार से निकल कर उसे अस्पताल से बाहर जाकर सिरिंज लानी पड़ती है और दोबारा आकर कतार में लगना पड़ता है।