फर्रुखाबाद। मेला रामनगरिया में साधु-संत व कल्पवासी गंगा स्नान कर उपासना और धर्म-कर्म में व्यस्त हैं। मेला समापन की ओर बढ़ने के साथ भीड़ भी बढ़ रही है। साधु संतों की शोभायात्रा और उनके करतब देखने भीड़ उमड़ रही है। शुक्रवार को भी शोभायात्रा निकाली गई। नागा संतों ने शाही स्नान किया।
पांचाल घाट पर चल रहा मेला रामनगरिया के समापन को नौ दिन बचे हैं। सर्दी भी कम हो गई है। मेले में स्नान करने वालों की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है। कल्पवासियों की राउटियां रिश्तेदारों से भरी हैं। भोर होते ही श्रद्धालु गंगा स्नान करके धर्म-कर्म में जुट जाते हैं।
कथा पंडालों में कल्पवासी प्रवचन का पुण्यलाभ भी ले रहे हैं। बच्चा स्वामी शिवस्वरूप महाराज के क्षेत्र नियमित यज्ञ चल रहा है। इसमें भक्त भी आहुतियां देते हैं। आदर्श क्षेत्र में ब्रह्मचारी सत्यस्वरूप महाराज के यहां यज्ञ और कथा में भीड़ पहुंच रही है। बाजार और मनोरंजन क्षेत्र भी गुलजार हैं।
शुक्रवार को श्रीपंच दसनाम आह्वान अखाड़ा दशाश्वमेध घाट काशी वाराणसी के क्षेत्र से सत्यगिरी महाराज की अध्यक्षता और रामानंद गिरी महाराज के नेतृत्व में शोभायात्रा निकाली गई। यात्रा में दो रथ शामिल रहे। एक रथ पर भगवान की झांकी और दूसरे पर साधु संत विराजमान थे। साधु संत बैंडबाजों की ध्वनि पर झूमते चल रहे थे। भक्तों ने पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। संतों ने करतब भी दिखाए। नागा संतों ने गंगा में शाही स्नान कर हर-हर गंगे का जयघोष किया। परिक्रमा रास्ते से होते हुए शोभायात्रा क्षेत्र में विसर्जित हुई। वहां प्रसाद बांटा गया। महंत पदमपुरी, बलराम पुरी, महंत, सर्वेश पूरी, सागरपुरी आदि मौजूद रहे।
पर्यावरण शुद्धि का मंत्र दिया
वैदिक क्षेत्र में पर्यावरण शुद्धि एवं रोग निवारक यजुर्वेद पारायण महायज्ञ में आहुतियां दी गईं। यजमान धर्मवीर आर्य एवं शिखा आर्या, अरविंद कुमार एवं प्रियंवदा आर्या ने आहुति दीं। हरिओम शास्त्री व आचार्य ओमदेव ने यज्ञ संपन्न कराया। दोपहर में राष्ट्र रक्षा सम्मेलन में क्षत्रपति वीर शिवाजी की जयंती मनाई गई। डॉ. शिवराम सिंह आर्य ने कहा कि शिवाजी ने मुगलों से जीवन भर संघर्ष करके सनातन धर्म तथा वैदिक संस्कृति की रक्षा की। आचार्य चंद्रदेव शास्त्री ने कहा कि युवाओं में चेतना जागने पर ही परिवर्तन संभव है। आर्य समाज का उद्देश्य युवाओं का चरित्र निर्माण तथा राष्ट्रप्रेम की भावना का विकास करना है। आचार्य महावीर शास्त्री, संदीप आर्य, यशवीर आर्य ने भी प्रवचन दिए। शिवनारायण आर्य, उदयवीर शास्त्री, उदिता आर्या ने गीत और भजन सुनाए। कार्यक्रम में स्वामी सोमवार पुरी महाराज, लालगिरी, दिलीप यादव, सत्येंद्र अग्निहोत्री शालिनी आदि मौजूद रहे।