फर्रुखाबाद। जंग ए आजादी में यहां हिंदू और मुस्लिमों की समान भागीदारी रही है, वहीं महिलाओं ने भी अभूतपूर्व योगदान दिया है। यहां के तकरीबन ढाई सौ लोगों को अंग्रेजों ने कैद करके मौत के घाट उतारा था। 94 बसंत देख चुके डा. कैसर खां बताते हैं कि यहां के 249 लोगों को अंग्रेजों ने काला पानी की सजा दी थी।
19 दिसंबर 1996 को गोवा से पुर्तगालियों को भगाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले डा. कैसर खां बताते हैं कि यहां के 128 सेनानियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी और गदर के दौरान ट्रिब्यूनल के तीन जजों की बैठक में 626 लोगों पर मुकदमे चलाए गए।
इसी क्रम में रिसालदार, जवाहर खां को कासगंज में तोप से उड़ा दिया गया। 1922 में जन्में डा. कैसर खां ने अपनी आंखों से जंग-ए-आजादी की लड़ाई देखी है। उनका कहना है कि अंग्रेज सेनानियों को खुले में फांसी देते थे। पेड़ पर आजादी के परवाने फांसी के फंदे में लटके मिलते थे।
अंग्रेजों के भय के बाद भी यहां के लोगों ने हार नहीं मानी और उन्होंने अंग्रेजों को भारत छोड़ने को मजबूर कर दिया। आज आजादी के इन पुरोधाओं के परिवार बुरे हाल से गुजर रहे हैं। न उनकी शासन सुन रहा है और न प्रशासन सुन रहा है।
गोवा आंदोलन के सेनानी डा. कैसर खां को मलाल है कि जिनके खून से जले चिरागों की रोशनी में आज हम आजादी की वर्षगांठ मना रहे हैं। उन आजादी के परवानों को हमारी नई पीढ़ी भूलती जा रही है। उनकी कुर्बानी को याद करने वाले बिरले लोग ही रह गए हैं। याकूतगंज की रहने वाली अमीना खातून पुत्री महताब भी आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी पर झूल गई थीं। ऐसी तमाम महिलाएं हैं, जिन्होंने आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी।
किसी की हत्या को किसी को देश निकाला
जवाहर खां के पुत्र की पटियाली में हत्या कर दी गई। गंगा सिंह को देश निकाले की सजा दी गई। इसी क्रम में शबराती घोड़ा नखास, यावर अली बरौन, ईमान खां हाथीखाना, दुलार सिंह खसौरा, ब्रजराज सिंह खिमसेपुर, हैदर अली, दाऊद शाह भोजपुर, खुशहाल सिंह अमृतपुर, अमीना खातून पुत्री महताब हुसैन याकूतगंज, शिवमंगल पांडेय मित्तूकूंचा, कासिम हुसैन खां, बरकत उल्ला खां रुदायन, सरदार सिंह कुरार, शिवदयाल सिंह अमृतपुर, महिपाल सिंह राजेपुर, मुंशी चंद्रसेन खानपुर, दुलार सिंह मोहम्मदाबाद, रहमत जमा खां कायमगंज चिलौली, पंडित राधा मोहन संकिसा, मनोहर लाल कंपिल, अकबर सिंह नवीगंज, महाराज सिंह भोजपुर, महादेव प्रसाद भोजपुर, हिदायत उल्ला शेखपुर, हातिम अली शेखपुर, मिलाउत अली खां गऊखाना कायमगंज, सुंदरलाल मिश्र कटरा कायमगंज और अब्दुल रहमान समेत 153 लोगों को फांसी दी गई थी।