कायमगंज। करोड़ों की लागत से बनी मिल से गांव में चलने वाले कोल्हू पर बनने वाला गुड़ चीनी से ज्यादा मुनाफा दे रहा है। चीनी मिल हर वर्ष करोड़ों का घाटा उठाती है। वहीं, किसान गांव में कुटीर उद्योग से ज्यादा लाभ उठा लेते हैं। बाजार में चीनी के सापेक्ष गुड़ का दाम भी अच्छा मिलता है। क्षेत्र के कई गांव में लगे 31 कोल्हू चीनी मिल से ज्यादा गन्ने की पेराई कर रहे हैं।
कायमगंज क्षेत्र में इस बार किसानों ने 5420 हेक्टेयर में गन्ने की बुआई की है। इसमें 47,42,500 क्विंटल गन्ने की उपज का अनुमान है। पिछले सत्र में चीनी मिल ने किसानों से 15, 51000 क्विंटल गन्ने की पेराई की थी। इस साल भी इतने गन्ने की पेराई का अनुमान है। अमृतपुर क्षेत्र का कुछ गन्ना रूपापुर चीनी मिल को चला जाता है। बाकी गन्ना गांव में लगे कोल्हू पर किसान मजबूरी में कम दाम में बेच देते हैं।
कोल्हू पर गुड़ के अलावा राब और खाने के लिए सिरका भी तैयार किया जाता है। मिल में गन्ना आपूर्ति के लिए सट्टा और पर्ची की झंझट से बचने के लिए बहुत से किसान कोल्हू पर गन्ना बेचना पसंद करते हैं। कुछ किसान खेत खाली करने की जल्दी में भी कोल्हू पर गन्ना बेच देते हैं। चीनी मिल में गन्ने का भाव 350 रुपये प्रति क्विंटल है। कोल्हू पर किसान 290 से लेकर 300 रुपये क्विंटल पर गन्ना बेच रहे हैं।
चीनी मिल में अब तक दो लाख क्विंटल से अधिक गन्ने की पेराई हो चुकी है। वहीं, कोल्हू वाले भी 1.56 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर चुके हैं।
चीनी से महंगा बिक रहा है गुड़
मिल में बनने वाली चीनी से ज्यादा दामों में गुड़ बिक रहा है। चीनी मिल में एक क्विंटल गन्ने से साढ़े आठ किलो चीनी तैयार होती है। एक क्विंटल गन्ने की खरीद 350 रुपये है। इस तरह बाजार के थोक भाव से साढ़े आठ किलो चीनी 38 रुपये किलो के भाव से 323 रुपये की होती है। इस तरह चीनी मिल को 27 रुपये प्रति क्विंटल का घाटा है। इसमें मिल के और खर्चे जोड़े जाएं तो घाटा और बढ़ जाएगा। चीनी मिल में घाटे को कवर करने के लिए आसवानी इकाई लगाई गई। यहां शीरे से रेक्टिफाइड स्प्रिट व एथेनॉल बनाकर घाटा पूरा किया जाता है। गांव ममापुर निवासी कोल्हू संचालक पिंटू गंगवार ने बताया कोल्हू पर एक क्विंटल गन्ने में 13 किलो गुड़ तैयार होता है।
बाजार में गुड़ करीब 40 रुपये बिक रहा है। इस तरह 300 रुपये की गन्ने की खरीद में 520 रुपये का गुड़ तैयार हो जाता है। इस औसत से मिल की अपेक्षा गुड़ का कारोबार बेहतर है। पड़ोसी जनपद मैनपुरी, एटा, कुरावली में गुड़ की बड़ी मंडियां हैं। इन मंडियों में गुड़ आसानी से बिक जाता है।
कोल्हू पर 90 क्विंटल हो जाती है पेराई
कोल्हू संचालक रज्जाक ने बताया कि पूर्व में क्रसर पर चीनी बनती थी। धीरे-धीरे चीनी के दाम घटते चले गए। इसके बाद गांव से यह कारोबार बंद हो गया। इसके बाद कोल्हू की संख्या बढ़ गई। कोल्हू पर एक दिन में 90 क्विंटल गन्ने की पेराई हो जाती है। सभी खर्चे निकालकर गुड़ का कारोबार बेहतर है।