फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ड्रेस वितरण में लापरवाही

Tue, 16 Dec 2014 11:42 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शासन करोड़ों रुपये खर्च कर मिडडे मील व ड्रेस वितरण समेत विभिन्न योजनाएं चला रहा है। साथ ही शासन के सख्त आदेश हैं कि बच्चों के लिए चल रही योजनाओं में घालमेल न किया जाए लेकिन अफसर इस पर गंभीर नहीं हैं। यूनिफार्म वितरण में जमकर खेल चल रहा है।
विज्ञापन

जिलाधिकारी एनकेएस चौहान के सख्त आदेश के बावजूद बच्चों को रेडीमेड स्कूल ड्रेस बांटी जा रही हैं। वहीं सिलवाई गई ड्रेसाें की क्वालिटी घटिया है। स्कूल भले ही नाप लेने के बाद इन्हें सिलवाने का तर्क देते हाें लेकिन ढीलीढाली ड्रेसें सारी असलियत खोल रही हैं। मंगलवार को अमर उजाला ने जिले के परिषदीय विद्यालयों की पड़ताल की तो ड्रेस वितरण में हर जगह झोल दिखाई दिया-

एक तो ढीली, ऊपर से टेलर का टैग नहीं
मोहम्मदाबाद। कन्या प्राथमिक विद्यालय राजीव नगर मोहम्मदाबाद की कक्षा 5 की छात्रा करीना और छात्र नहसुल खां ने बताया कि अभी तक उन्हें ड्रेस नहीं मिली है। ड्रेस के लिए नाप ली गई थी। सहायक अध्यापक नवीन कुमार वर्मा ने बताया कि ड्रेसें अभी सिलकर नहीं आई हैं। प्राइमरी पाठशाला अवंतीबाई नगर मोहम्मदाबाद में बच्चों को ड्रेस का वितरण तो कर दिया गया है लेकिन इन पर टेलर का टैग नहीं है।
विज्ञापन

छात्रा कल्पना, नीतू, जूली और रूबी ने बताया कि ड्रेसें ढीली हैं। करन कुमार, निर्मल कुमार, अनस मोहम्मद, पवन कुमार और अंकित कुमार ने बताया कि उन्हें अभी तक ड्रेसें नहीं मिली हैं। सहायक अध्यापिका सुमनप्रभा यादव ने बताया कि ड्रेसें सिलने के लिए दी गई हैं।
ढीली ड्रेसों के बारे में कहा कि हेडमास्टर को इस बारे में जानकारी होगी। वे जिला मुख्यालय पर गए हैं। प्राइमरी पाठशाला शास्त्री नगर नगला कायस्थान की छात्रा तान्या ने बताया कि अभी ड्रेस नहीं मिली है। ऋतिक सैनी, धीरू, शिवजीत और अंश ने बताया कि नाप ली गई थी।
हालांकि ड्रेस पर टेलर का टैग नहीं लगा था। सहायक अध्यापिका सुलक्षणा यादव ने बताया कि इंचार्ज प्रधानाध्यापिका ममता यादव ड्रेसों की फिटिंग कराने गई हैं। उन्होंने बताया कि ड्रेसें सिलवाकर दी गई हैं। उन्होंने बताया कि 165 और 125 बच्चों की ड्रेसों का पैसा मिला है।

सिलाई खुली, बटनें व चेन खराब
कमालगंज। प्राथमिक विद्यालय मोहनपुर दीनारपुर में ड्रेसों की क्वालिटी काफी घटिया है। अधिकतर बच्चों की ड्रेसों की सिलाई खुल गई है। बटनें भी टूटने के साथ कालर भी फट गए हैं। छात्र अनरेश, विनय कुमार और मोहित कुमार ने बताया कि उनकी नाप ली गई थी।
 करीब आठ दिन पहले ड्रेस मिली थी लेकिन उनकी शर्ट की बटनें टूट गई हैं। सिलाई भी खुल गई है। प्रधानाध्यापिका विनय बिसारिया ने बताया कि ड्रेस सिलवाकर बांटी है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय गौंसपुर में बच्चों की ड्रेसों पर सिलाई घटिया थी। छात्र फैजान ने बताया कि नाप ली गई थी लेकिन अभी ड्रेस नहीं मिली है। कुछ बच्चों को मिल गई है। इंचार्ज प्रधानाध्यापिका मंजूलता ने बताया कि कुछ बच्चों की शर्ट आ गई हैं। पैंट आते ही ड्रेस बंटवाई जाएगी। ड्रेस सिलवाकर बांटी गई है।
प्राथमिक विद्यालय बिचपुरी में बच्चों की दी गई  ड्रेस घटियाहै।  स्कर्ट की सिलाई खुलने लगी है। किसी पैंट की चेन खराब थी तो किसी की बटनें टूटी थीं। छात्रा मांडवी ने बताया कि उसकी ड्रेस की सिलाई खुल गई है। छात्र पुनीत ने बताया कि पैंट की चेन खराब हो गई है। प्रधानाध्यापिका अंजू कटियार ने बताया कि सिलाई ठीक न होने से खुल गई होगी।

बांटी गई रेडीमेड ड्रेस
शमसाबाद। प्राथमिक विद्यालय हजियांपुर में रेडीमेड ड्रेसों का वितरण किया गया है। ड्रेसों पर टेलर का टैग भी नहीं लगा था। बच्चोें से जब पूछा गया कि उनकी नाप ली गई तो उन्होंने बताया कि उनकी नाप नहीं ली गई। प्रधानाध्यापक कुलवंत सिंह यादव ने बताया कि ड्रेस सिलवाकर बांटी है।
 बच्चे झूठ बोल रहे हैं। नाप कराई थी। प्राथमिक विद्यालय पसियापुर में बच्चों को दी गई ड्रेस में टेलर का टैग लगा था। ड्रेस सही थी। किरन, रुचि और उषा ने बताया कि नाप ली गई थी। 15 दिन पहले ड्रेस का वितरण किया गया लेकिन एक जोड़ी ही दी गई है।


सिलवाकर दी गईं
नवाबगंज। प्राथमिक विद्यालय नवाबगंज में सिली हुई ड्रेस बच्चों को दी गई है। ड्रेस पर ज्योति स्वरूप टेलर का टैग लगा है। प्रधानाध्यापक संजीव रंजन ने बताया कि नाप लेकर बच्चों की ड्रेस बनवाई गई है। प्राथमिक विद्यालय हुसैनपुर में भी बच्चों को दी गई ड्रेस की क्वालिटी ठीक है। प्रधानाध्यापक सैयद आसिफ अली ने बताया कि ज्योति स्वरूप टेलर से ड्रेस सिलवाई गई है।

रेडीमेड घटिया ड्रेसें बंटवाईं
अमृतपुर। प्राथमिक विद्यालय गलारपुर में 118 बच्चे पंजीकृत हैं। अभी तक 67 बच्चों को ड्रेस दी गई है। ड्रेसकी गुणवत्ता ठीक नहीं थी। देखकर लग रहा था कि ड्रेस रेडीमेड हैं। किसी  शर्ट की आस्तीन बड़ी थी तो किसी की छोटी। ड्रेस पर टेलर का टैग भी नहीं था। बच्चों ने बताया कि उनकी नाप नहीं ली गई। प्रधानाध्यापिका अर्चना बरतरिया ने बताया कि ड्रेसों को किसी से खरीदा है।
उन्होंने रेडीमेड दीं या सिलवाकर, इसकी जानकारी नहीं है। प्राथमिक विद्यालय परमापुर में ड्रेस की क्वालिटी अच्छी नहीं थी। बच्चे जो ड्रेस पहने थे वह ढीली भी थीं। ड्रेसों पर टेलर का टैग भी नहीं था। प्रधानाध्यापक दिगंबर सिंह ने बताया कि ड्रेसें अमृतपुर के मोहन टेलर से सिलवाई हैं। 90 बच्चों को ड्रेस बांटी गई है। वहीं प्राथमिक विद्यालय हरिहरपुर में अभी तक ड्रेसों का वितरण नहीं किया गया है।
यहां ड्रेसें एक कमरे में झाल में बंद पड़ी हैं। शिक्षामित्र शोभना सिंह ने बताया कि प्रधानाध्यापक जानें कि  ड्रेसें क्यों नहीं बांटी गईं। उनसे जब पूछा गया कि ड्रेस सिलवाई गईं तो उन्होंने बताया कि खंडौली के एक ठेकेदार से रेडीमेड मंगवाई गई हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें