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लोहिया अस्पताल का खाना ही बांट रहा मरीजों को संक्रमण

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फर्रुखाबाद। डा. राममनोहर लोहिया अस्पताल में मरीजों के लिए खाना बनाने की रसोई ही संक्रमण फैला रही है। जमीन पर बिछे कपड़े पर रोटी बेली और सेंककर रखी जाती हैं। इतने बर्तन भी नहीं, जो दाल, सब्जी ढककर रख दी जाए। मरीजों को मूंग और अरहर की पतली दाल ही दी जाती है। फलों के दो दर्शन तक नहीं होते। शासन से आने वाले धन का दुरुपयोग हो रहा है।
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अस्पताल में भर्ती मरीजों का मर्ज के हिसाब से मेन्यू होता है। मगर यह रसोई में उपलब्ध नहीं है। वहां कभी मूंग की दाल बनती है तो कभी अरहर की। एक सब्जी भी बन जाती है। इसके अलावा कोई व्यवस्था नहीं होती। रसोई में व्यवस्था के नाम पर जमीन पर बिछे कपड़े पर रोटी बेली जाती और उसी पर सेंककर रख देते हैं। यही नहीं रसोई में इतने बर्तन तक नहीं हैं, जो खाना सुरक्षित रूप से रखकर मरीजों तक पहुंचाया जा सके। एक कुकर है, भगोना टूटा है। अस्पताल का संक्रमण बचाने के लिए कोई बंदोबस्त नहीं हैं। इससे साफ है कि मरीजों को खाने से ही संक्रमण बांटा जाता है।
मरीजों को थमा देते हैं ठंडे दूध के पैकेट
लापरवाही की हद यह है कि मरीजों को गर्म दूध देने के बजाय उन्हें ठंडे दूध का पैकेट ही थमा दिया जाता है। ऐसे में मरीज अथवा तीमारदार पांच रुपये खर्च करके गर्म कराकर दूध का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।
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न डस्टबिन है, न व्हील चेयर
अस्पताल के आर्थ्रो वार्ड तो दूर किसी भी वार्ड में डस्टबिन की व्यवस्था नहीं है। लिहाजा मरीज खाना आदि सामान के रैपर इधर-उधर फेंकने को मजबूर होते हैं। यही नहीं आर्थ्रो वार्ड में अधिकतर दुर्घटना के मरीज होते हैं, लिहाजा एक अदद व्हील चेयर तक नहीं है।
कंपिल थाने के गांव सिकंदरपुर खास के सुनील चतुर्वेदी 30 दिसंबर से भर्ती हैं। बोले, सुबह कुछ नहीं मिलता। दोपहर में पतली दाल, मूंग अथवा अरहर की मिल जाती है। शाम को रोटी सब्जी। फल आदि कभी नहीं आए।
आर्थ्रो वार्ड में भर्ती नीरज ने बताया कि फलों के तो कभी दर्शन नहीं हुए। शाम को दूध आता है। वह भी ठंडा। जिन मरीजों के पास तीमारदार नहीं होता, वह दूध का उपयोग कैसे करेगा। यह अस्पताल प्रशासन को सोचना चाहिए।
जहानगंज के गांव डल्लूनगला के जगदीश चंद्र पाल ने बताया कि पतली दाल बेहद खराब होती है। यदि यहां से उठकर न जाओ, तो खाना मिलना ही मुश्किल होता है। तीमारदार न हो तो पड़ोसी की मदद लेनी पड़ती है।
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यहां कोई डस्टबिन नहीं है। व्हीलचेयर की व्यवस्था भी नहीं। दूध गर्म कराने को पांच रुपये खर्च करना होता है। खाना क्या समय काटना है। वही पतली दाल।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
सीएमओ डा. चंद्रशेखर ने बताया कि वह खुद मामले को देखकर जांच कराएंगे। यदि व्यवस्था गड़बड़ है तो उसे दुरुस्त कराया जाएगा।
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