फर्रुखाबाद/कमालगंज। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के खाड़ी देशों में भी फैलने से वहां रह रहे भारतीय सहमे हुए हैं। परिजन और रिश्तेदार लगातार फोन से संपर्क बनाए हुए हैं। कुवैत में स्कूल बंद कर ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। बाहर भीड़ भी नहीं लगने दी जा रही है। कतर व कुवैत में फंसे लोगों के परिजन चिंतित हैं।
कमालगंज के मोहल्ला सुभाषनगर निवासी हाजी अशफाक के पुत्र आफताब अहमद 2003 में कुवैत गए थे। उन्होंने कमालगंज के जनता इंटर कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद अलीगढ़ से एमएससी की थी। वह, वहां चिकित्सा क्षेत्र की मशीनों से जुड़े व्यवसाय में काम करते हैं। कुवैत पर हमले को लेकर सुभाषनगर मोहल्ले के लोग चिंतित हैं। इस समय हाजी अशफाक का परिवार छोटे बेटे सुहैल के पास दिल्ली में है। यहां के लोगों ने सुहैल से बात कर आफताब के बारे में कुशल क्षेम पूछी।
सुहैल ने फोन पर संवाद न्यूज एजेंसी को बताया कि भाई से मैसेज के द्वारा बात हो रही है। कभी कॉल भी लग जाती है। व्हाट्सएप कॉल में नेटवर्क की समस्या रहती है। आफताब ने बताया था कि वहां कुवैत में बाहर भीड़ लगाने पर मनाही है। स्कूल-कॉलेज बंद हो गए हैं। पढ़ाई ऑनलाइन कर दी गई है। हालत बिगड़ी तो भारतीय दूतावास से गाइडलाइन मिलने की संभावना है।
वहीं महमदपुर अचला नवादा निवासी हाजी इदरीश के बेटे मोहम्मद नफीस कतर में हैं। वह 10 फरवरी को ही एक माह रहकर वापस कतर गए। नफीस के पिता हाजी इदरीश इस समय अपनी ससुराल गुरसहायगंज के डुंडवा में परिवार समेत हैं। कतर में रह रहे नफीस की पत्नी, बेटा एवं बेटी डुंडवा में ही हैं। नफीस के साले महमदपुर अचला निवासी अतीक पप्पू ने बताया कि नफीस भाई से फोन पर बात हुई थी। कतर में लोग सहमे हुए हैं। राशन-पानी इकट्ठा कर रहे हैं।