सूखे के बाद पिछले महीने बारिश से तबाह किसानों के जख्म पर मरहम लगाने के
लिए सरकार ने जो मुआवजा दिया है उससे कई किसान तो दोबारा जुताई तक नहीं करा
पाएंगे। दरअसल हालिया मुआवजा के तौर पर 18 हजार रु पया प्रति हेक्टेयर रकम
तय की गई है। न्यूनतम मुआवजा 750 रुपया है। किसानों का कहना है कि जो रकम
मुआवजा में मिली है वह ऊंट के
मुंह में जीरा जैसी है। इस बावत अधिकारियों
का कहना है कि फौरी राहत के तौर पर मुआवजा का जो फार्मूला सरकार ने तय किया
है, उसी का अनुपालन कराया गया है। बारिश और तेज हवाओं से तीनों तहसीलों
(फर्रुखाबाद, कायमगंज, अमृतपुर ) में 20,430 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई
है। 539 किसानों का 50 फीसदी से अधिक नुकसान हुआ है। 25 से 49 फीसदी
नुकसानी के दायरे में 378 गांवों के 7692 किसान हैं। हवाओं से गेहूं की फसल
गिरने व सड़ने से 60 से 65 फीसदी पैदावार प्रभावित
हुई लेकिन मुआवजा कम
दिया जा रहा है। कई किसानों को तो बर्बादी का 10 फीसदी मुआवजा भी नहीं दिया
जा रहा है। तीन हेक्टेयर फसल में नुकसानी का ही मुआवजा दिया जा रहा है।
इससे ज्यादा रकबा में नुकसानी वाले किसान मुआवजा के दायरे से बाहर हैं।
मुआवजा की रकम प्रति हेक्टेयर 18 हजार रुपया तय की गई है जबकि किसानों का
जुताई, बुवाई, सिंचाई और
पैदावार में 4 हेक्टेयर में करीब चार लाख रुपया
खर्च हुआ है। छोटे किसानों को न्यूनतम 750 रुपये मुआवजा दिया जा रहा है।
इतनी रकम से यह दोबारा जुताई भी नहीं करा पाएंगे। तय सरकारी रेट से मुआवजा
दिया जाता तो यह धनराशि (सिंचित, असिंचित क्षेत्र के लिए ) 72 हजार रुपया
होती है। मुआवजा की चेक भुनाने के लिए किसानों को बैंक में खाता खुलवाना
होगा। यह इनके लिए सिरदर्दी है। इससे भी यह परेशान हैं। 18 हजार रुपया
नुकसानी की दर से 4 हेक्टेयर में
फसल बर्बादी वाले किसानों को 72 हजार
रुपया मिलना चाहिए था। यह इन्हें नहीं मिला। जिन किसानों का 25 फीसदी से 49
फीसदी नुकसान हुआ है उन्हें भी मुआवजा देने का एलान किया गया है। इसके लिए
7692 किसानों की सूची शासन को भेजी गई है। इनके लिए अभी पैसा रिलीज नहीं
हुआ है। जिला प्रशासन को मुआवजा के लिए 17 लाख 90 हजार 120 रुपया मिला था
जो बांट दिया गया है।