अमृतपुर। आईजीआरएस की शिकायतों के निस्तारण में पुलिस घटनास्थल पर जाने की बजाय पीड़ितों को थाने बुलाकर निस्तारण कर देती है। यही कारण है कि 50 फीसदी से अधिक पीड़ित असंतुष्ट हो रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में दरोगा ने पीड़ित को थाने बुलाया और फोटो खींचकर शिकायत निस्तारित कर दी। शिकायतकर्ता ने एसपी से मिलकर अपना दर्द बताया है।
थाने के गांव परतापुर खुर्द के रामकिशन ने सोमवार को एसपी आरती सिंह के सामने पेश हुए। उन्होंने कहा कि उसने गांव के ही कुछ प्रभावशाली लोगों के खिलाफ शिकायत की थी। इसकी जांच कर रहे दरोगा शिशुपाल सिंह ने 23 मई को उन्हें फोन करके थाने बुलाया। वह पत्नी रामा देवी के साथ शाम चार बजे थाने गए।
दरोगा को उन्होंने घटना का पूरा सच बता दिया। गाली गलौज की रिकार्डिंग भी उनके पास होने की बात बताई। दरोगा ने थाने में ही उनकी एक फोटो खींच ली। कहा कि कल यानी 24 मई को गांव आकर रिकार्डिंग लेंगे। दरोगा ने उनका मोबाइल मांगा। जब देने से इन्कार किया, तो जेल भेजने की धमकी दी। डर की वजह से मोबाइल दे दिया। कुछ देर मोबाइल चलाने के बाद वापस किया। रात में ही उसके मोबाइल पर शिकायत के निस्तारण का मैसेज आ गया।
पीड़ित ने कहा कि गांव आने की बजाय दरोगा ने थाने बुलाकर धोखे से फर्जी निस्तारण किया है। यही नहीं एक आरोपी को ही निस्तारण में गवाह बना दिया। उन्होंने विपक्षी को लाभ पहुंचाने का काम किया है। इसकी जांच कर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाए। रामकिशन ने बताया कि एसपी ने जांच कराकर न्याय दिलाने का भरोसा दिया है।
दरोगा शिशुपाल सिंह और थानाध्यक्ष मोनू शाक्या से पक्ष जानने के लिए फोन किया, लेकिन रिसीव नहीं हो सका। सीओ अजय वर्मा ने बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। शिकायत आने पर जांच के बाद कार्रवाई होगी।