फर्रुखाबाद। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में रीजेंट न होने तो कहीं मशीन खराब होने से सीबीसी जांच ठप है। व्यवस्थाएं न सुधर पाने से स्वास्थ्य सेवाएं बद से बदतर होती जा रही हैं। इससे मरीजों को निजी लैब से जांच कराना मजबूरी है।
सरकार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। इसके बावजूद इन व्यवस्थाओं पर लापरवाही हावी है। हालात यह हैं कि जब संक्रामक रोग अधिक फैलते हैं, उस दौरान ही सरकारी अस्पतालों में जांच पर संकट आ जाता है। इन दिनों भीषण गर्मी में डायरिया, बुखार आदि के मरीजों की संख्या बढ़ी है। इससे सीबीसी जांच की जरूरत पड़ रही है। इस बीच किसी सीएचसी पर रीजेंट (केमिकल) नहीं है तो कहीं सीबीसी मशीन ही खराब पड़ी है। इससे मरीजों को सीबीसी जांच के लिए निजी लैब पर पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
व्यवस्था पर एक नजर
सीएचसी शमसाबाद में रीजेंट काफी पहले समाप्त हो चुका है। सीबीसी मशीन भी खराब है। सीएचसी कायमगंज में पहले रीजेंट खत्म हुआ। जब रीजेंट मिला तो मशीन खराब है। सीएचसी राजेपुर में रीजेंट न होने से सीबीसी जांच नहीं हो पा रही है। वहीं शहर के सिविल अस्पताल लिंजीगंज में पिछले छह वर्ष से सीबीसी मशीन खराब है। यहां न तो मशीन को ठीक कराया जा रहा है और न ही दूसरी मशीन की व्यवस्था की गई। इससे मरीजों को सीबीसी जांच के लिए निजी लैब पर 200 से 400 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं नवाबगंज सीएचसी पर मशीन ठीक होने से प्रतिदिन 20 से 25 मरीजों की सीबीसी जांच कराई जा रही है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
प्रभारी सीएमओ एसीएमओ डॉ. मलिक आलमगीर ने बताया कि वह इस मामले को सीएमओ के सामने रखेंगे। शीघ्र ही सीबीसी मशीन ठीक कराने और रीजेंट उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। इससे मरीजों को जांच की सुविधा मिल सके।