फर्रुखाबाद (मोहम्मदाबाद)। मासूम बच्ची को अगवाकर उससे हैवानियत के बाद हत्या करने के मामले में पुलिस की कार्यशैली फिर से सवालों के घेरे में है। परिजनों का कहना है कि अगर पुलिस समय रहते सक्रिय हो जाती तो शायद उनकी मासूम बच्ची की जान बच जाती। सुबह बच्ची के अपहरण की सूचना के बाद भी पुलिस ने रात को रिपोर्ट दर्ज करने के बाद उसकी तलाश शुरू की, लेकिन फिर कुछ नहीं मिला। दूसरे दिन उसका शव सीमा से सटे एक गांव के खेत में पाया गया।
गर्मी की छुट्टियां मनाने अपनी बुआ के गांव आई आठ वर्षीय बच्ची सोमवार को आम बीनने पास के बाग में गई थी। वहीं से लापता हो गई थी। परिजनों ने बताया कि उन्होंने तत्काल नजदीकी पुलिस चौकी पर जाकर बच्ची के लापता होने की सूचना दी। पुलिस ने उन्हें यह कहकर वापस कर दिया कि पहले खुद तलाश करें।
पिता अन्य परिजनों के साथ घटनास्थल के रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों में बच्ची को तलाश करता रहा, लेकिन कुछ पता नहीं चला। दोपहर तक बच्ची का कुछ पता न चलने पर परिजन फिर से पुलिस चौकी पहुंचे। इस बार पुलिस ने पिता का नाम, पता और मोबाइल नंबर दर्ज किया। परिजनों को यह कहकर वापस कर दिया कि पुलिस अपना काम कर रही है। वह लोग भी आसपास के क्षेत्र में खोजबीन करें। बच्ची की तलाश में बेहाल परिजन जब थक हारकर घर लौटे। इस बार परिजनों ने सुबह सात बजे से सीसीटीवी फुटेज देखे, जिसमें बच्ची शुक्रवार की सुबह 8:15 बजे साइकिल से पैदल जा रहे अधेड़ के पीछे जाती नजर आई।
परिजनों ने बताया कि बच्ची के लापता होने की सूचना सुबह 10 बजे दी थी। इसके बाद भी पुलिस ने रात 10:07 बजे रिपोर्ट दर्ज की। परिजनों का कहना है कि यदि उसी समय पुलिस सक्रिय हो जाती, तो आरोपी को पकड़ना आसान होता और मासूम की जान बच सकती थी।
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