भीनी-भीनी खुशबू लहकी, बेदम की दुनिया महकी... इन पंक्तियों के साथ 145वें
सालाना उर्स हुसैनी मुजीबी फरखुंदी का आगाज हुआ। इस दौरान दरगाही म्यूजियम
भी खोला गया। इसमें इस्लाम के शुरुआती काल की संरक्षित कलाकृतियां और अंग
वस्त्रों की जियारत कराई गई।
मोहल्ला सूफी खां की दरगाह हुसैनिया
मुजीबिया में उर्स का आगाज होते ही यहां अकीदत बिखर गई। सोमवार को सुबह
रिवायती तौर पर सज्जादा नशीन शाह फसीह मुजीबी ने दरगाह का म्यूजियम खोला।
इसमें संजोयी गईं दुर्लभ पैगंबरे इस्लाम के जमाने और उनके जांनिसार सहाबा
के प्रयोग की वस्तुएं, वस्त्र, कलाकृतियां और रेखाचित्र देखकर लोग
अचंभित
रह गए और अकीदत से सिर झुका दिए। सज्जादा नशीन ने कहा कि यह दुर्लभ वस्तुएं
बुजुर्गों से मिली हैं। इसमें हाजी इस्लाम अली, असलम नवाब, बिलाल शफीकी,
रहमत अली, मुतीबुल हसन, हस्सान मुजीबी, इंतिजार अली, हाजी भोले, आफताब अली
और मेराज खां आदि मौजूद रहे।
संजोई गईं वस्तुएं दरगाह की अमानत
पैगंबरे
इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा का मुए मुबारक (बाल), हजरत अली का पटका,
खान-ए-काबा के गिलाफ के कपड़े का टुकड़ा, बुजुर्गों का कल्मी (हस्तलिखित)
कुरआन शरीफ, पैगंबरे इस्लाम द्वारा लोगों को भेजे खत, मैदाने कर्बला की
मिट्टी से बनी तस्वीह (माला), इस्लामी खलीफाओं हजरत अली, हजरत इमाम हसन और
इमाम हुसैन आदि कलाकृतियां संरक्षित हैं।
म्यूजियम दूसरे सज्जादा नशीन की देन
दरगाह
के दूसरे सज्जादा शाह तालिब हुसैन ने देश दुनिया का सफर किया और इस्लामी
महापुरुषों की दुर्लभ वस्तुओं को जमा किया। बतौर अमानत म्यूजियम कायम कर
दिया। शाह फसीह मुजीबी ने बताया कि बुजुर्गों की वस्तुओं की हर साल रबीउल
अव्वल की 20 तारीख को अवाम को जियारत की रस्म निभाई जाती है।
आजादी से जुड़ा है दरगाह का इतिहास
दरगाह
के तीसरे सज्जादा हजरत फरखुंद अली ने देश की आजादी में बढ़-चढ़कर भाग लिया
और खिलाफत आंदोलन के अगुवाकार बनकर जिले में अंग्रेजी साम्राज्य के खिलाफ
माहौल बनाया। उनके कार्यकाल में महात्मा गांधी, मौलाना लियाकत अली, मौलाना
शौकत अली, मोतीलाल नेहरू, रफी अहमद किदवई जैसे स्वतंत्रता संग्राम
सेनानियों ने हाजिरी दी, जबकि मुलायम सिंह यादव, शिवपाल सिंह यादव जैसी
सियासी शख्सियतों का आना रहा है।
उठा गागर जुलूस
कालाबाग से
सज्जादा नशीन की अगुवाई में कालाबाग से गागर जुलूस धूमधाम से उठा। इसमें
मुन्ना मेहरवान ताज कव्वाल ने कलाम पेश किए। कार्यक्रम में अकीदतमंदों की
भीड़ उमड़ी।