फर्रुखाबाद। दहेज के लिए पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने में विशेष न्यायाधीश एससीएसटी महेंद्र सिंह ने गवाह व साक्ष्यों के आधार पर दोषी पति को सात वर्ष की सजा सुनाई है। दोषी पति को 25 हजार रुपये अर्थदंड जमा करने के आदेश दिए।
शहर कोतवाली के मोहल्ला नवाब न्यायमत खां निवासी अशोक दीक्षित ने पुत्री शालिनी उर्फ मोना की राजेपुर थाना क्षेत्र के गांव दहेलिया निवासी रामानंद से 2 जून 2013 को शादी की थी। शादी के कुछ माह बाद ही ससुरालीजन दहेज में एक कार की मांग कर शालिनी को प्रताड़ित करने लगे। 16 जुलाई 2014 को अशोक को गांव के एक ग्रामीण ने पुत्री शालिनी की मौत की सूचना दी।
17 जुलाई 2014 को अशोक बेटी की ससुराल पहुंचे। जहां शालिनी को मृत अवस्था में पड़ा पाया। अशोक ने पति रामानंद, देवर व सास के दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। विवेचक ने छानबीन के बाद दहेज को लेकर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के मामले में पति रामानंद के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। मुकदमे की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश ने गवाह व साक्ष्य के आधार पर पति रामानंद को दोषी करार कर सात वर्ष की सजा सुनाई। उन्होंने दोषी को 25 हजार का अर्थदंड जमा करने के आदेश दिए। अर्थदंड नहीं जमा करने पर दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भोगने के आदेश दिए।