फर्रुखाबाद। बिना नक्शा के ही भवनों के निर्माण से शहर की सूरत बिगड़ रही है। प्रस्तावित महायोजना के दो वर्ष औपचारिकता में ही बीत गए। आपत्तियों का निस्तारण दो माह पूर्व होने के बावजूद अभी नक्शे को ही अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। जब महायोजना ही लटकी है, तो शहर के सुनियोजित होने का सपना कैसे पूरा होगा।
शहर को सुनियोजित कर सुंदरीकरण कराने के लिए वर्ष 2031 तक के लिए महायोजना प्रस्तावित है। मास्टर प्लान तैयार करने के लिए जयपुर की कंपनी बिल्डकॉन ने शहर का नक्शा तैयार किया। प्रशासन ने नक्शा प्रदर्शित कर लोगों से आपत्तियां व सुझाव मांगे थे। नए नक्शे में ग्रीन बेल्ट, पार्क आदि निकाले जाने पर करीब 3700 से अधिक आपत्तियां व सुझाव दिए गए। इसमें सर्वाधिक आपत्तियां भू-परिवर्तन से संबंधित थीं। जिन स्थानों पर मकान बने खड़े हैं, वहां खाली भूमि दिखाकर पार्क प्रस्तावित कर दिया गया। जून 2022 में कमेटी ने आपत्तियों पर सुनवाई की। 23 मार्च 2023 कलक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों की कमेटी ने आपत्तियों का निस्तारण भी कर दिया।
सूत्रों की मानें तो कुछ स्थानों पर आपत्तियों के आधार पर भू-परिवर्तन पर भी विचार किया गया है। फिलहाल दो माह बीत जाने के बाद भी शहर के नक्शे को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। 10 वर्ष के लिए लागू महायोजना के दो वर्ष बीत चुके हैं। अब निर्माण, विकास कार्य व सुंदरीकरण कराने के लिए आठ वर्ष बचे हैं। महायोजना में प्रस्तावित ग्रीनलैंड में भवन निर्माण के नक्शे भी पास नहीं किए जा रहे। इससे प्लाट खरीदने वाले लोग मजबूरी में बिना नक्शा के ही भवनों का निर्माण करा रहे हैं। जिम्मेदारों की ढिलाई के चलते महायोजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। इससे शहर की सूरत बिगड़ती जा रही है। जबकि शहर को नगर निगम बनाने के लिए पहले ही शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। धीमी गति से काम चलने से व्यावसायिक गतिविधियां भी प्रभावित हैं।
सिटी मजिस्ट्रेट दीपाली भार्गव ने बताया कि आपत्तियों का निस्तारण हो चुका है। महायोजना के नक्शे को अंतिम रूप सहयुक्त नियोजक संभागीय नियोजन कानपुर से दिया जाएगा। इसी के बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी। दूसरी ओर सहयुक्त नियोजक संभागीय नियोजन कानपुर सुधीर कश्यप ने बताया कि जिलास्तर पर ही कुछ औपचारिकताएं पूर्ण होनी हैं। शीघ्र ही मानचित्र को अंतिम रूप दिया जाएगा।