राजकीय इंटर कालेज फर्रुखाबाद में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से बना छात्रावास चार साल में पशु-पक्षियों का बसेरा बन गया है।
छात्रावास के कमरों में पक्षियों ने घरौंदा बना लिया है। छात्रावास परिसर में अराजकतत्वों और आवारा पशुओं का डेरा रहता है। कमरों के अंदर शराब की बोतलें और नशीले इंजेक्शन की सिरिंजें पड़ी हैं। अधिकतर कमरों की जालियां स्मैकिये उखाड़कर ले गए। खिड़कियां भी टूटी हैं। छात्रावास परिसर के चारों ओर बड़ी-बड़ी घास खड़ी है।
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से करोड़ों रुपये की लागत से राजकीय बालक इंटर कालेज फर्रुखाबाद के मैदान में छात्रावास का निर्माण कार्य कराया गया था। छात्रावास के आठ कमरों में पंखे भी लगवाए गए थे। पेयजल के लिए दो पानी की टंकियां रखवाई गईं। बिजली का कनेक्शन नहीं है।
आसपास रहने वाले लोगों की मानें तो छात्रावास बनने के बाद सिर्फ एक बार ही इसमें विद्यार्थी आकर रहे। बिजली कनेक्शन न होने से रात में विद्यार्थियों को दिक्कत उठानी पड़ती थी। इसके अलावा अराजकतत्वों के कारण भी विद्यार्थियों ने छात्रावास छोड़ दिया। करीब चार साल से इस छात्रावास में कोई नहीं रह रहा है।
इस समय छात्रावास के मुख्यगेट पर ताला लगा है। आसपास बड़ी-बड़ी घास खड़ी है। इसके परिसर में स्मैकियों और अराजकतत्वों का जमावड़ा लगता है।
यहीं जुए के फड़ भी लगते हैं। छात्रावास के अधिकतर कमरों में ताश की गड्डियां, सिरिंज और बीयर आदि की केनें पड़ी रहती हैं। छात्रावास जाने वाला मार्ग भी जर्जर हो चुका है। कमरों से बिजली की फिटिंग भी गायब है।
पेयजल के लिए सबमसर्बिल पंप लगा है लेकिन बिजली कनेक्शन न होने से चलता नहीं है। कमरों में बेड भी नहीं पड़े हैं। रंगाई-पुताई भी नहीं करवाई गई है। देखरेख के अभाव में करोड़ों की लागत से बना छात्रावास बदहाल पड़ा है। अफसरों ने भी आज तक इसके निरीक्षण की जहमत नहीं उठाई।