पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने कहा कि हिंदी को रोजगार से जोड़ा जाए। शिक्षण संस्थानों में भारतीय शास्त्रों को पढ़ाना अनिवार्य किया जाए। राज्यपाल ने शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन की जरूरत भी बताई।
शनिवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था अभिव्यंजना के कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
पीडी डिग्री कॉलेज फतेहगढ़ सभागार में बोलते हुए उन्होंने कहा कि हिंदी भारत की पहचान है। हिंदी को जो स्थान मिलना चाहिए, वह तमाम लोगों के प्रयास के बाद भी नहीं मिल रहा। हिंदी को राष्ट्रीय स्वाभिमान, पहचान से नहीं जोड़ा गया। प्रशासन का काम हिंदी में होना चाहिए।
कहा कि हिंदी को रोजगार की भाषा बनाया जाए तो वह खुद अपना अधिकार प्राप्त कर लेगी। हिंदी को सरकार नौकरी से जोड़ें।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा के स्तर में गिरावट चिंताजनक है। चांस के आधार पर शिक्षा ठीक नहीं है। मस्तिष्क के विकास व प्रतिभाओं को उजागर करने के लिए शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन जरूरी है। उन्होंने पुरस्कार वापसी के मुद्दे पर कुछ भी कहने से मना कर दिया।
वरिष्ठ पत्रकार अंशुमान तिवारी ने कहा कि विचार व अभिव्यक्ति के मूल्यों में बदलाव से परिवर्तन आता है। इंटरनेट के बाद अभिव्यक्ति का विस्फोट हुआ है। आज सभी कह रहे हैं, सभी सुन रहे हैं। शब्दों को विशाल समुंदर है। इस दौर में ऐसा लिखा जाए जो नए संदर्भ में टिक सके।
विशिष्ट अतिथि आरआरसी के सेनानायक ब्रिगेडियर सलीम आसिफ की पत्नी मोना आसिफ ने कहा कि हिंदी भाषा नहीं, मातृभाषा है। यह हमारी पहचान होनी चाहिए। हिंदी भाषा ऐसा सूत्र है, जो सभी को एकता के सूत्र में बांध सकता है।
संस्था प्रमुख डा. रजनी सरीन ने कहा कि अभिव्यंजना एक आंदोलन है। कहा कि साहित्यकार कुछ ऐसा रचें कि अलगाववादी विचार कट जाएं। डा. श्रीकृष्ण गुप्त ने आभार जताया।
इस अवसर पर यदुनंदन गोस्वामी, डा. ब्रह्मदत्त अवस्थी, रामेश तिवारी विराम, मेजर सुनील दत्त द्विवेदी, प्रांशु दत्त द्विवेदी, रजनीकांत शुक्ल, विमल कटियार, डा. रामकृष्ण राजपूत, जवाहर सिंह गगंवार, दिवाकरनंद दुबे, कृष्णकांत अक्षर, उपकार मणि उपकार, निमिष टंडन, एके सिंह, उर्मिला राजपूत, सुलक्षणा सिंह, सुषमा जाटव की उपस्थिति उल्लेखनीय रहीं।