फर्रुखाबाद/कमालगंज। दो साल से घाटे का दंश झेल रहे किसानों के लिए इस बार मूंगफली का दाना सोने जैसा बन गया है। अच्छे मौसम ने जहां भरपूर पैदावार दी, वहीं ऊंचे भाव से छह हजार रुपये बीघा की लागत के बीच 24 हजार रुपये तक की मूंगफली निकल रही है।
हाल के वर्षों में किसानों का मूंगफली की खेती की ओर रुझान बढ़ा है। लेकिन दो सालों से घाटे के कारण कुछ किसान विचलित हुए। पिछले साल तो बारिश ने मूंगफली की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया था। खुदाई के समय लगातार बारिश से फसल पानी में डूब गई थी। मूंगफली की गुणवत्ता प्रभावित होने से भाव भी नीचे रहे। भटपुरा के किसान राधे का कहना है कि पिछले साल 3,500 से 4,000 रुपये क्विंटल ही मूंगफली बिकी थी, जबकि इस बार सात से आठ हजार रुपये आसानी से मिल जा रहा है।
100 से 105 दिन में फसल तैयार
गांधीनगर के किसान नेता कश्यप ने बताया कि दस हजार रुपये क्विंटल बीज आया। एक बीघा में 10 से 12 किलो बीज के हिसाब से 1200 रुपये का बीज लगा। 700 रुपये की खाद, सल्फर, कीटनाशक, पानी मिलाकर तीन हजार रुपये लागत आई। खुदाई, खंदाई आदि का ठेका भी लगभग तीन हजार रुपये बीघा पड़ रहा है। इस तरह एक बीघा में करीब छह हजार रुपये का खर्चा आया। जबकि तीन क्विंटल प्रति बीघा पैदावार मिल रही है। कुछ किसानों ने तो साढ़े तीन क्विंटल तक माल निकाला। इस तरह करीब 24 हजार रुपये की मूंगफली निकल रही है।
शाहजहांपुर तक माल ले जाते हैं किसान
किसान जागृति संस्था चलाने वाले मूंगफली उत्पादक उन्नतिशील किसान जहानगंज रोड निवासी अरुण राठौर कहते हैं कि मूंगफली में सुंडी रोग से बचाव करना बहुत जरूरी है। कुछ खेतों में फफूंद से भी बचाव करना पड़ता है। बलुई मिट्टी में इसकी फसल ज्यादा अच्छी होती है। फर्रुखाबाद में मूंगफली की बड़ी मंडी नहीं है। इसलिए किसान शाहजहांपुर की अल्लाहगंज व जलालाबाद मंडी में माल ले जाते हैं। छिबरामऊ मंडी कम लोग जाते हैं। पिछले साल नुकसान के कारण 30 से 40 प्रतिशत रकबा कम हो गया।
मूंगफली की अधिक पैदावार व फसल सुरक्षा को लेकर किसानों को लगातार तकनीकी जानकारी दी गई थी। उत्पादन व शानदार भाव मिलने से किसान उत्साहित हैं।
अरविंद मोहन मिश्र, उप निदेशक कृषि