डीएम के गोद लिए गांव ब्राहिमपुर में अतिकुपोषित बच्चे की मौत के बाद स्वास्थ्य महकमे की आंख खुली है। गुरुवार को स्वास्थ्य टीम ने घर-घर जाकर कुपोषित बच्चों की जांच की। टीम के सदस्यों ने अभिभावकों को अतिकुपोषित बच्चों को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराने केे लिए प्रेरित किया। इसके लिए अभिभावक तैयार नहीं हुए।
डीएम के गोद लिए गांव ब्राहिमपुर में बुधवार को विनोद के अतिकुपोषित बच्चे गुड्डू की मौत हो गई थी। गांव में राधा पुत्री अजय और अर्जुन पुत्र जयपाल भी अतिकुपोषित बच्चों की सूची में दर्ज हैं। ये गांव में ही रह रहे हैं। डीएम ने पिछले महीने इन बच्चों का गांव में परीक्षण कराकर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश दिए थे।
गांववालों का विश्वास लोहिया के इलाज से पूरी तरह उठ चुका है। इनका कहना है कि लोहिया में बच्चों की समुचित देखभाल नहीं होती है। इससे वे बच्चों को लोहिया में भर्ती नहीं कराएंगे। गुड्डू की मौत के बाद गुरुवार को चिकित्साधीक्षक श्रीप्रकाश ने डा. नदीम इकबाल, डा. केके राजपूत, गौरव मिश्रा व अतीत वर्मा की टीम को गांव भेजकर बच्चों की जांच कराई।
टीम ने ब्राहिमपुर के नौ और वलीपुर गढ़ी के छह कुपोषित बच्चों के घर जाकर जांच की। वलीपुर के अतिकुपोषित राजेश की आठ माह की पुत्री रवीना का वजन मात्र 2.5 किलोग्राम होने पर टीम ने उसे लोहिया में भर्ती कराने की सलाह दी। इस पर परिजन तैयार नहीं हुए।
जांच टीम के डा. नदीम इकबाल ने बताया कि गुड्डू को लोहिया में भर्ती कराया गया था। परिजन पूरा इलाज कराए बिना उसे कुछ दिन बाद घर ले आए थे। वे बच्चे का सौरिख के एक निजी चिकित्सालय में इलाज करा रहे थे। इन्होंने बताया कि अभिभावकों को सलाह दी है कि सभी कुपोषित बच्चों को लोहिया अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करा दें।