फर्रुखाबाद। डा. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल के इमरजेंसी का स्टाफ बरामदे में बैठकर काम करने से दुखी है। उनका कहना है कि महिला-पुरुष अस्पताल की ओपीडी और कोतवाली को भी 72 घंटे के लिए सील करके स्टाफ क्वारंटीन किया गया, मगर इमरजेंसी डाक्टर समेत अन्य स्टाफ को यह सुविधा नहीं मिल रही है। यहां सिर्फ एक पंखा ही लगा है। गर्मी-उमस से उन्हें काफी दिक्कतें हैं।
कोतवाली के दीवान ओमप्रकाश शर्मा को 21 जून को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। इसके बाद उन्हें रेफर किया गया था। कानपुर में उनकी मृत्यु हो गई और नमूने की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके बाद कोतवाली को पूरी तरह सील कर स्टाफ क्वारंटीन कर दिया गया था। बावजूद इसके इमरजेंसी का रूम बंद कर दिया गया। वार्डों के मरीज दूसरी जगह शिफ्ट किए गए थे।
स्टाफ को क्वारंटीन नहीं किया गया। पूरा स्टाफ बरामदे में बैठकर इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों को 24 घंटे देख रहे हैं। इमरजेंसी के ईएमओ डा. अभिषेक चतुर्वेदी ने बताया कि पूरे स्टाफ को क्वारंटीन होना चाहिए था। मगर ऐसा नहीं किया गया। स्टाफ तीनों शिफ्टों में 72 घंटे से काम कर रहा है।
सीएमएस डा. एसपी सिंह ने बताया कि जिस हिस्से में पॉजिटिव मरीज गया था, वहां बंद कर दिया गया है। अब जो मरीज आ रहे हैं, उन्हें रेफर किया जा रहा है। इमरजेंसी सेवा को बंद करना जनता के हित में नहीं होगा। शुक्रवार को 72 घंटे पूरे हो जाएंगे।