कायमगंज। सर्दी के इस मौसम में जैसे-जैसे पारा नीचे गिर रहा है, बच्चे व बुजुर्ग सर्दी खांसी व कोल्ड डायरिया की चपेट में आने लगे हैं। ठंड के मौसम में कोल्ड डायरिया सबसे ज्यादा खतरनाक है।
सही समय पर इससे बचाव कर बच्चों को सर्दी से बचाया जा सकता है। यदि बच्चे की सांस तेज चल रही हो, सांस में घरघराहट, शरीर शिथिल पड़ने लगे, बेहोश होने लगे या झटके आएं, यह निमोनिया के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत बच्चे को चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। सीएचसी में ऐसे बच्चे व बुजुर्ग आ रहे हैं। चिकित्सक उन्हें सर्दी से बचाव के उपाय के साथ दवा दे रहे हैं।
सोमवार को सीएचसी की ओपीडी में दोपहर एक बजे तक मरीजों की खासी भीड़ रही। कोल्ड डायरिया व नियमोनिया की चपेट में आई 6 माह की पूर्ति, अफ़सा(3), अब्दुल(2), अफजल(4) व धर्मवीर(60), माया देवी(80) को डॉ. अमरेश कुमार ने देखा। उन्हें दवा के साथ सर्दी से बचाव के उपाय बताए गए।
सर्दी में भी होता है डायरिया
सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधीक्षक डॉ. शिवप्रकाश का कहना है कि लोगों में भ्रांति है कि डायरिया गर्मी में ही होता है। यह ठंड में भी हो जाता है और रोटा वायरस के कारण होता है। इसके बचाव के लिए शिशुओं का टीकाकरण कराया जाता है। बच्चों में थोड़ी लापरवाही दिक्कत पैदा कर सकती है। बच्चों के पेट में दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। अधिक दस्त होने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। निजी चिकित्सक डॉ. विकास शर्मा के यहां अब तक कई ऐसे मामले आ चुके हैं। जिनमें पीड़ित बच्चों को फर्रुखाबाद में किसी विशेषज्ञ से इलाज कराने की सलाह दी गई है। सर्दियों में इसका वायरस अधिक सक्रिय हो जाता है। इसका बचाव रखना जरूरी है।
यह हैं लक्षण
पेट मे मरोड़ के साथ दस्त व उल्टी होना, भूख न लगना, पैरों में ऐठन होना, बच्चे का सुस्त रहना, बुखार आना।
बचाव के उपाय
कोल्ड डायरिया से बचाने के लिए बच्चों को गीले बिस्तरों से बचाएं, दूध गुनगुना करके ही दें, उबला हुआ पानी पिलाएं, अच्छी तरह गर्म कपड़ों को पहनाकर रखें, पानी में भीगने व खुले में खेलने से बचाएं।