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वोटरों को रिझाने के लिए प्रधान और दावेदार एक पैर पर रहते खड़े

Wed, 17 Jun 2015 11:45 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
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गांव में कोई बीमार हो तो एंबुलेंस से पहले दरवाजे पर प्रधान की गाड़ी खड़ी हो जाती है। प्रधान जी थोड़ा भी चूके तो दूसरे दावेदार खिदमत में हाजिर हो जाते हैं। शादी ब्याह के मौके पर भी प्रधान और प्रधानी के दावेदार व्यवस्था संभालते नजर आ रहे हैं। गांवों का यह बदला हुआ परिदृश्य आगामी त्रिस्तरीय चुनाव की वजह से है। चुनाव की आहट मिलते ही प्रधान व बीडीसी के दावेदार चुनावी चुग्गा डालने लगे हैं। इन दिनों हर मतदाता का हाल चाल पूछने से लेकर मददगारों तक की लंबी
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फेहरिस्त नजर आ रही है। हालांकि ये खिदमतदार मतदाताओं की सेवा करना अपना कर्तव्य बताते हैं, लेकिन अचानक मदद के लिए होने वाले हृदय परिवर्तन की वजह का इनके पास कोई जवाब नहीं है। जिले में 603 ग्राम पंचायतें हैं। पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान भी शुरू हो गया है। इसी के साथ बिसात भी बिछने लगी है। वोटरों को रिझाने के लिए मदद के पिटारे खोल दिए गए हैं। गांव में किसी के बीमार होने पर एंबुलेंस के लिए फोन करने से पहले

प्रधान जी की गाड़ी दरवाजे पर खड़ी हो जाती है। इस मदद के लिए इन्हें न किराए की दरकार है और न ही डीजल की। गांव में किसी का निधन होता है तो प्रधान का ट्रैक्टर अंत्येष्टि स्थल तक जाने के लिए बिना कहे हाजिर हो जाता है। इसके लिए भी कुछ देना नहीं पड़ता। जरूरत पड़ी तो आर्थिक मदद के लिए भी तैयार । गांव से बारात गई तो भी प्रधान की गाड़ी जाएगी। वह भी बिना किराया के। बेटी की शादी के मौके पर बारातियों की खातिरदारी में यह सबसे आगे हैैं । गुठिना के
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प्रधान व प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष महावीर सिंह यादव कहते हैं कि गांव के लोगों ने उन्हें प्रधानी की जिम्मेदारी दी है। वह इसे निभा रहे हैं। प्रधानों की तर्ज पर दावेदार भी वोटरों की मदद में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। किसान के पास पैसे नहीं हैं तो सिर्फ डीजल पर सिंचाई का इंतजाम। इनकी कोशिश प्रधान से पहले मदद देने की होती है। प्रधान ने पहली बाजी मार ली तो यह दूसरी तरह से मदद की पेशकश करते हैं। बलीपुर के प्रधान अजब सिंह यादव कहते हैं कि गांव के लोगों की

मदद करना फर्ज है। प्रधानी से पहले भी गांव के लोगों का सहयोग करते थे। आज भी कर रहे हैं।
मदद की यह तस्वीर एक या दो ग्राम पंचायतों की नहीं है। तकरीबन हर गांव की यह कहानी है। प्रधानों के साथ ही क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के दावेदार भी वोट पक्का करने के लिए दु:ख दर्द में शामिल होने के लिए एक पांव आगे रहते

हैं। फतनपुर की प्रधान अनीता चतुर्वेदी का कहना है कि गांव के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए वह तत्पर हैं। कोई भी मदद मांगता है तो उसे निराश नहीं किया जाता है।
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