मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर और एटा की फैक्ट्रियों से निकले कचरे ने काली नदी के पानी को पूरी तरह से प्रदूषित कर दिया है। बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) की मात्रा शून्य होने से नदी का पानी जलीय जीव-जंतुओं के लिए काल बन गया है।
नदी का पानी पिछले चार दिन से गंदे नाले के पानी से बद्तर हो गया है। इससे पशुओं ने भी पानी पीना छोड़ दिया है। पानी दूषित होने की वजह मेरठ में चीनी मिल का पेराई सत्र शुरू होने के बाद गंदा पानी नदी में पहुंचना बताया जा रहा है।
वहीं, काली नदी से गंगा में छोड़ी गई गंदगी और बदबू की वजह से कानपुर के गंगा बैराज व आसपास खड़ा होना मुश्किल है। बैराज पर आम-तौर पर पानी साफ रहता है। जाजमऊ में भी गंगाजल की स्थिति बदतर हो गई है। ये हाल तब है जब 12 जनवरी को माघ का पहला स्नान है।
मेला रामनगरिया भी इसी दिन शुरू होगा। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम बैराज जाकर गंगा जल में अचानक गंदगी बढ़ने की जांच करेगी।
गंगा में हरिद्वार से छोड़े जा रहे गंगाजल के साथ ही बीच में काली नदी और बिठूर के पांच नाले मिलते हैं। इस प्रकार गंगा बैराज में ऊपर (हरिद्वार की तरफ) से रोज लगभग 4000 क्यूसेक पानी आ रहा है।
बैराज का जलस्तर 112.90 मीटर बरकरार रखते हुए आठ गेटों के माध्यम से इतना ही पानी रोज इलाहाबाद की तरफ छोड़ा जा रहा है। सिंचाई विभाग के अनुसार दो दिन से बैराज में आ रहे पानी में गंदगी बढ़ गई है।