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कोल्ड स्टोर में पड़ा है एक लाख मीट्रिक टन आलू

Sun, 06 Nov 2016 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद
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बुवाई के लिए दवा लगाकर सुखाया जा रहा आलू। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शीतगृह उद्योग पर आलू की निकासी न होने से संकट के बादल छाने लगे हैं। आलू गड़ाई की अंतिम तिथि 31 अक्तूबर निकल जाने के बाद भी जिले के 65 शीतगृहों में एक लाख मीट्रिक टन आलू जमा है। इसको लेकर शीतगृह मालिक परेशान हैं। जिले में 42 हजार हेक्टेयर भूमि पर गत वर्ष आलू की फसल तैयार की गई थी, जिसमें 12 लाख मीट्रिक टन आलू की पैदावार हुई थी। साढ़े छह लाख मीट्रिक टन आलू किसानों ने बेच दिया और साढे़ पांच लाख मीट्रिक टन आलू शीतगृहाें में भंडारित कर दिया।
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निकासी शुरू होने के बाद अब तक 80 फीसदी आलू निकल चुका है। इधर, आलू पर छाई मंदी के चलते किसानों ने आलू को शीतगृह से निकलना बंद कर दिया है। 1800 रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाला आलू मौजूदा समय में आधे दाम पर बिक रहा है। बाजार में गुल्ला आलू की कीमत 800 रुपये प्रति क्विंटल, 3797 आलू 900 रुपये और चिपसोना आलू 1000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। इन हालातों में आलू बेचने से किसानों के लागत के दाम नहीं निकल रहे हैं।

दूसरी तरफ किसानों ने बीज के लिए आलू 31 अक्तूबर निकाल लिया है। अब 15 नवंबर के बाद आलू की बुवाई का समय समाप्त हो जाएगा। इन हालातों में शीतगृहाें में ही आलू पड़ा रह सकता है। स्वामी रामाधार शीतगृह जहानगंज के मालिक मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि 31 अक्तूबर तक ही निकासी का समय होता है। उनका कहना है कि बाहर की मंडियों में आलू की मांग कम होने से निकासी नहीं हो रही है।
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दूसरी तरफ आलू आढ़ती संघ के अध्यक्ष सतीश वर्मा का कहना है कि कश्मीर जाने वाले आलू की मांग कम हो गई है। इस वजह से लिवाली नहीं रह गई है। प्रगतिशील किसान नारद सिंह का कहना है कि लिवाली कम होने के कारण किसान आलू नहीं निकाल रहा है। उनका मानना है कि अधिकांश किसान शीतगृहों मे आलू छोड़ देंगे।

किसान रामनिवास प्रधान सुरजूपुर, नेत्रपाल ताजपुर सहित दर्जनों किसानों का कहना है कि जिस भाव में आलू बिक रहा है, उस भाव में बेचने से शीतगृह का किराया नहीं निकल रहा है। इस वजह से वह आलू शीतगृह से नहीं निकालेंगे।

आलू विकास अधिकारी नेपाल राम ने कहा कि किसान अपना आलू शीतगृहों से निकालकर बाजार में बेचें। भले कम दाम मिल रहे हों। आलू की यह स्थिति किसान के लोभ के कारण हुई है। किसान यह चाहता है कि आलू के दाम अच्छे मिलें। इस वजह से आलू की निकासी समय से नही करता। यही वजह है कि आलू में किसानाें को घाटा हो जाता है।
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