फर्रुखाबाद। दरगाह हुसैनिया मुजीबिया के 146वें उर्स में गंगा जमुनी तहजीब की छटा बिखरी रही। कार्यक्रम के दौरान गुलपोशी और चादरपोशी का क्रम चलता रहा।
रविवार को शहर की दरगाह हुसैनिया मुजीबिया में अकीदतमंदों का तांता लगा रहा। दिन भर विभिन्न धर्मों के लोगों ने चादरपोशी कर मन्नत मांगी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौलाना मुख्तार अहमद कादरी ने वलियों की महत्ता पर प्रकाश डाला।
दरगाह के सज्जादानशीन शाह फसीह मुजीबी ने अकीदतमंदों की तरक्की की दुआ की। शहर कारी सैय्यद मुताहिर अली, हाफिज मोहम्मद हारुन, कारी तनवीर रजा, शाकिर अली ने कु रान की तिलावत की। शनिवार रात को दरगाह पर आयोजित महफिल में कव्वाल और शायरों ने समां बांध दिया।
लखनऊ से आए कमर वारसी, कफील अफसर, खैराबाद के सबीद नाजिर, बाराबंकी से मुबीन, मुकीम वारसी और शहर के मुन्ना मेहरबान कव्वाल ने बुजुर्गों का आशिकाना कलाम पढ़ा। अच्छे शेरों पर अकीदतमंदों ने नजराने पेश किए।
कुल फातहा के बाद अकीदतमंदों को लंगर तस्लीम किया गया। इस मौके पर शकूर मुजीबी, मिन्ना खां, आफताब अली, शेर अफगन खां, वसीमुज्जमां खां, महताब खां, शरीक अहमद, शाकिर अली, साबिर अली, मुजीबुल हुसैन, आसिफ कुरैशी, रहमत अली, मोहम्मद हसीन आदि मौजूद रहे।