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वरुण पूजन के साथ निकली भव्य कलश यात्रा

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शहर के अंगूरी बाग स्थित ऋषि आश्रम के वार्षिकोत्सव में निकली कलश यात्रा में शामिल नैमिषारण्य से आ? - फोटो : FARRUKHABAD
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ब्रह्मस्वरूप नैमिषव्यास पीठाधीश्वर की पुण्य स्मृति में ऋषि आश्रम के 60वें वार्षिकोत्सव के तीसरे दिन दिव्य कलश यात्रा निकाली गई। शाम को श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। रथ पर सवार नैमिषव्यास पीठाधीश्वर श्रीमज्जगदाचार्य स्वामी उपेंद्रानंद सरस्वती की आरती उतारी गई। यात्रा पर फूलों से वर्षा की गई।
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वार्षिकोत्सव में मंगलवार को श्रीरामचरित मानस समापन के बाद बुधवार को लोहाई रोड स्थित श्रीराधा श्याम शक्ति मंदिर से वरुण पूजन के साथ कलश यात्रा का शुभारंभ हुआ। कलश यात्रा में सबसे आगे बैंड भजन गाते चल रहा था। उसके पीछे पीतवस्त्रधारी ध्वज पताकाएं लिए बच्चे थे। उसके पीछे महिलाएं, युवतियां और बच्चे सिर पर कलश रखकर चल रहे थे।
सबसे पीछे रथ पर सवार स्वामी उपेंद्रानंद सरस्वती महाराज और उनके साथ अन्य संत चल रहे थे। कलश यात्रा चौक, लोहाई रोड, घुमना, सुतहट्टी बाजार, साहबगंज चौराहा, अंगूरीबाग होते हुए आश्रम स्थल तक पहुंची। वहां वेदमंत्रोच्चार के साथ कलश की स्थापना की गई। वेदपाठी यात्रा में हाथ में ध्वज लेकर वेदमंत्रोच्चार करते चल रहे थे।
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कलश यात्रा में ऋषि आश्रम और नैमिष से पधारे वेदपाठी ब्राह्मण आकर्षण का केंद्र रहे। व्यवस्थापक स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी ने बताया कि गुरुवार को दोपहर ठीक 12 बजे अरणी मंथन से अग्नि का प्राकट्य होगा।
इसी के साथ सात्विक विष्णु महायज्ञ का शुभारंभ होगा। इसमें मटरलाल दुबे, उदय सिंह चौहान, राकेश गुप्ता, मिथलेश गुप्ता आदि लोगों का सहयोग रहा। संचालन डा. अश्वनी कुमार मिश्र ने किया।
भागवत के महात्म का विस्तार से किया वर्णन
ऋषि आश्रम में दोपहर दो बजे से श्रीमद्भागवत व्यास रामस्वरूप चतुर्वेदी ने भागवत का महात्म का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने धुंधकाली के उद्धार की कथा को भी सुनाया। कहा कि कथा सुनने को जरूरी नहीं, तो दो-चार घंटे बैठें। घड़ी-दो घड़ी ही सुनी गई कथा को अपने जीवन में उतारें, तो समझो पूरा प्रतिफल मिल गया।
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