फर्रुखाबाद। जनपद में पिछले चार दिनों से शुरू हुई आलू की सरकारी खरीद किसानों के लिए राहत नहीं ला पाई है। सख्त मानकों के कारण किसान सरकारी खरीद केंद्रों से आलू नहीं बेच पा रहे हैं। इससे उन्हें 650.09 रुपये प्रति क्विंटल के निर्धारित भाव का लाभ नहीं मिल रहा है।
केंद्र सरकार ने आलू की मंदी से किसानों को उबारने के लिए हाफेड के माध्यम से जिले में दो क्रय केंद्र स्वीकृत किए थे। इनमें से शहर की सातनपुर मंडी में एक क्रय केंद्र मंगलवार को खोला गया था। चार दिन बीत जाने के बाद भी केंद्र प्रभारी एक भी आलू नहीं खरीद सके हैं। शनिवार को करीब दस किसान आलू का नमूना दिखाने केंद्र पर पहुंचे थे। धूप में आलू ढीला हो जाने के कारण उनके नमूने फेल हो गए। कुछ किसानों ने केंद्र सरकार से आलू खरीद के मानक बदलने के लिए केंद्र प्रभारी को पत्र भी सौंपा। जिलाधिकारी अंकुर लाठर ने भी खरीद केंद्र का निरीक्षण किया था लेकिन मानकों की बाधा बनी रही।
सरकारी खरीद ठप होने के बावजूद मंडी में आलू की आवक जारी है। दूसरी ओर, मंडी में करीब सत्तर ट्रक आलू पहुंचा। व्यापारियों ने यह आलू 150 रुपये से लेकर 411 रुपये प्रति क्विंटल तक खरीदा। यह आलू झारखंड, बिहार, पूर्वांचल और छत्तीसगढ़ के लिए लोड किया गया। आढ़ती सुधीर वर्मा रिंकू ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्र से मायूस होकर लौट रहे किसान मंडी में कम दाम पर आलू बेचने को मजबूर हैं।
क्रय केंद्र प्रभारी रामकेश भारती ने बताया कि मानक के अनुसार आलू न आने से खरीद नहीं हो सकी है। किसानों द्वारा लाए गए आलू के नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। धूप में आलू के ढीले पड़ने से भी गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।