सरकारी अस्पतालों की पुरानी कहानी है। दवाएं तो दूर की बात सिरिंज खरीद के लिए भी परचा लिखा जाता है। एक तो डाक्टरो का टोटा है, उस पर तैनात डाक्टर भी समय से नहीं बैठते हैं। इससे मरीजों को खासी दिक्क तों का सामना करना पड़ता है। सरकारी अस्पतालो की बदइंतजाम पर अमर उजाला की रिपोर्ट।
ब्लाक क्षेत्र में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की लापरवाही से मरीजों को दिक्कत उठानी पड़ती है। दवाओं के अलावा सिरिंज तक बाहर से खरीदने के लिए लिखी जाती है। गुरुवार को ऐसी ही अव्यवस्था अस्पताल में देखने को मिली।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजेपुर में गुरुवार को दोपहर 11.30 बजे ओपीडी में मरीजों की भीड़ थी जबकि डॉक्टर नदारद थे। पूछने पर फार्मासिस्ट वीके मिश्र ने बताया कि चिकित्सक डा. मोहम्मद आरिफ सिद्दीकी अवकाश पर हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. ओमप्रकाश स्टाफ के साथ बैठक कर रहे हैं।
दवा लेने आईं रामप्यारी निवासी नगला केवल ने बताया कि काफी देर से डाक्टर के इंतजार में खड़ी हैं। वह अभी तक नहीं आए हैं। अनीता निवासी राजेपुर, राजू निवासी खरगपुर और देवेंद्र सिंह निवासी बख्शपुर का कहना था कि अक्सर अस्पताल में चिकित्सक कम ही मिलते हैं।
काफी इंतजार के बाद चिकित्सक हम मरीजों को देखने के लिए आते हैं। कुत्ता काटे का इंजेक्शन लगवाने आए शिवम द्विवेदी ने बताया कि अस्पतालकर्मियों ने सिरिंज बाहर से मंगवाई है। अधिकतर मरीजों का कहना था कि महंगी दवाएं बाहर से मंगवाई जाती हैं।
दवा के बारे में पूछे जाने पर बताया कि डायविटीज की दवा नहीं है। एंटी रैबीज इंजेक्शन दो-तीन ही बचे हैं। अस्पताल में सहायक नेत्र चिकित्सक अनिल विद्यार्थी, वार्ड व्वाय वीरेश सिंह, एक्सरे टेक्नीशियन रोहित और लैब टेक्नीशियन संजीव कटियार मौजूद मिले। पांच चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए लेकिन दो हैं।
अमृतपुर राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एलोपैथिक व महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं है। फुल टाइम एएनएम नहीं हैं। एक्सरे मशीन भी गायब है। खून व यूरिन की जांच तक की व्यवस्था नहीं है।
जनरेटर व फ्रिज नहीं होने से एंटी रैबीज व सांप काटे के इंजेक्शन नहीं हैं। अस्पताल में एकमात्र आयुष चिकित्सक डा. गौरव वर्मा की तैनाती है। गुरुवार को अस्पताल में आयुष चिकित्सक डा. गौरव वर्मा मरीजों को देखकर दवा दे रहे थे।
एक्सरे व खून की जांच कराने आए मरीज रामकिशन और पातीराम को राजेपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया गया। खांसी की दवा लेने आए सर्वेश कुमार ने बताया कि चिकित्सकों के न होने से दिक्कत होती है। रात में किसी भी चिकित्सक की तैनाती न होने के चलते शाम को 4 बजे अस्पताल बंद कर दिया जाता है।
शमसाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शमसाबाद में दवा लेने आईं ममता कुमारी के पैर से खून बह रहा था। पिता प्रमोद कुमार इधर-उधर अपनी बेटी की पट्टी कराने के लिए अस्पताल कर्मियों से फरियाद लगा रहे थे।
अस्पतालकर्मियों ने प्रमोद कुमार को पट्टी और रुई पकड़ा दी। प्रमोद कुमार ने खुद ही अपनी बेटी के पट्टी की। उमेशचंद्र ने बताया कि वह सुबह से कुत्ता काटे का इंजेक्शन लगवाने आए हैं लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों ने कहा कि 2.30 बजे के बाद इंजेक्शन लगेगा।
अधीक्षक डा. धनसिंह शाक्य ने बताया कि अस्पताल में एक्सरे, खून, बलगम आदि जांच की व्यवस्था है। सारी दवाएं हैं। किशोरी के पट्टी न किए जाने के बारे में चिकित्साधीक्षक ने बताया कि इसकी वह जांच करवाएंगे। दोषी स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फैजबाग में अव्यवस्थाओं का अंबार है। यहां बलगम की जांच न होने के चलते मरीज भटक रहे हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फैजबाग में बलगम जांच कराने आईं मालती देवी निवासी बड़ी कुइंया ने बताया कि बलगम जांच के लिए तीन-चार दिनों से भटक रहे हैं।
यही हाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पसियापुर का है। यहां डा. नवनीत गुप्ता की तैनाती है। अस्पताल परिसर में जगह-जगह गंदगी पसरी थी। बाउंड्रीवाल भी टूटी है।
दवा लेने आए नत्थूराम और मदनमोहन ने बताया कि दवा ठीक मिलती है। डा. नवनीत गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में एक्सरे, खून जांच की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा बार्ड ब्वाय एके वर्मा की तैनाती है।