फर्रुखाबाद। पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर मंडल के महाप्रबंधक उदय बोरवणकर ने बृहस्पतिवार शाम अमृत भारत स्टेशन के निर्माण की प्रगति देखी। उन्होंने निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। महाप्रबंधक ने मालगोदाम पर रेलवे ओवर ब्रिज की जरूरत भी परखी। उन्होंने पार्सलघर में कागजात गड़बड़ मिलने पर नाराजगी व्यक्त की।
महाप्रबंधक ने बताया कि एलिवेटेड ट्रैक निर्माण में ब्लॉक के समय यात्रियों को कानपुर के नजदीक तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। दिल्ली के लिए ट्रेन बढ़ाने का प्रस्ताव भी उनके संज्ञान में है। उन्होंने शाम 3.47 बजे स्पेशल ट्रेन से पहुंचकर एक नंबर प्लेटफॉर्म पर प्रस्तावित स्टेशन भवन का मानचित्र समझा। निर्माणाधीन कॉमर्शियल भवन की प्रगति और तीन पोर्टिको की जानकारी भी ली। स्वचालित सीढ़ियां भी देखीं और काम में तेजी लाने को कहा। यहां से वह पार्सलघर पहुंचे। वहां लिपिक अब्दुल मुस्तफा से बुकिंग बुक मंगवाई। कागजों के प्रिंट खराब होने पर नाराजगी व्यक्त की।
पुराने कॉमर्शियल भवन में बने यात्री प्रतीक्षालय की स्थिति भी समझी गई। उन्होंने मालगोदाम पर व्यापारियों और श्रमिकों के लिए पानी व बाथरूम की जानकारी ली। मुख्य प्लेटफॉर्म के बीच भूमिगत नाला बनवाने की बात बताई गई। प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक प्रकाश चंद्र जायसवाल ने चार-पांच नंबर प्लेटफार्म से कर्मियों के आवासों तक जाने के लिए 24 घंटे पटरी पार करके जाने में दिक्कत होने की जानकारी दी। इस दौरान मुख्य प्रशासनिक अधिकारी/निर्माण अनुज मित्तल, प्रमुख मुख्य इंजीनियर तुषार कांत पांडेय, प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधक राजेश कुमार, प्रमुख मुख्य संरक्षा अधिकारी नीरज गुप्ता, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी/निर्माण/आरएसपी नवीन कुमार झा, मंडल रेल प्रबंधक इज्जतनगर वीणा सिन्हा आदि मौजूद रहे।
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फोटो-26 जीएम के डिब्बे के गेट के सामने गड्ढे में खड़े होकर नजरों से बचाते अधिकारी। संवाद
...जब गड्ढे में खड़े होकर अफसरों ने जीएम की नजर से बचाया
फर्रुखाबाद। रेलवे स्टेशन के एक नंबर प्लेटफार्म पर जिस स्थान पर जीएम का डिब्बा लगा, वहीं ठीक सामने प्लेटफार्म पर करीब आधा फीट गहरा काफी गोलाई में गड्ढा था। अफसरों की नजर पड़ी, तो जीएम के उतरने से पहले ही बंद कराने की कवायद शुरू हुई। मगर तब तक जीएम उतर आए। उनकी नजर न पड़े, इसके लिए एक अधिकारी उसी गड्ढे में जबकि दो-तीन अधिकारी चारों तरफ खड़े हो गए। गनीमत रही कि जीएम वहां से आगे बढ़ गए, तो अधीनस्थों ने राहत की सांस ली। निरीक्षण के बाद वह वापस आए, तब तक गड्ढा भर दिया गया था। (संवाद)