अमृतपुर। रविवार को गंगा का जलस्तर पांच सेंमी गिरकर 137.25 मीटर पर स्थिर बना हुआ है। खतरे के निशान से 15 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। नरौरा बांध से 134584 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। गंगा में आई बाढ़ का प्रकोप ग्रामीण करीब 25 दिनों से से झेल रहे है। बाढ़ से प्रभावित गांव में पानी कम न होने परेशानी अब ओर बढ़ने लगी है। रहने के घर में जगह नहीं है। सड़क के किनारे पाॅलिथीन तान समय बिता रहे है। किए कही जगह तक नही बची है।
रामगंगा में खो हरेली रामनगर बैराज से 11623 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा का जलस्तर 135.25 मीटर पर है। गंगा में आई बाढ़ का कहर ही जारी था। लेकिन अचानक बारिश होने से बाढ़ पीड़ितों की मुसीबतें और बढ़ गई है। ओस व बारिश से बचने किए सड़क के किनारे त्रिपाल डाल कर रह रहे हैं। बारिश होने से लकड़ी, कंडा आदि भीग गया है। जिससे रोटी बनाने के लाले पड़ गए हैं।
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बाढ़ पीड़ितों की सड़ने लगीं पैरों की अंगुलियां
गंगा में आई बाढ़ का पानी गांव में कई दिनों से लगातार भरा हुआ है। इसके चलते ग्रामीण बाढ़ के पानी से घुस कर निकल रहे है। जिससे ग्रामीणों की पैर की उंगली सड़ने ग्रामीण परेशान है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव जुखाम, बुखार, खुजली, तथा आखों की बीमारी से परेशान है लेकिन गांव में स्वास्थ्य टीम नही जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में स्वास्थ्य टीम कैंप लगाकर दवा वितरण कर दे तो बीमारी से राहत मिल सकती है। गांव भुड़िया भेड़ा, हमीरपुर सोमवंशी, कुतुलूपुर, हरिहरपुर, भाऊपुर चौरासी, जोगराजोर, सौदापुर, आदि गांव प्रियांशु, रानी , संतोष, प्रेम, रामकांत, जयपाल, ओमकार, जयराम, पप्पू, ब्रजेश, आदि बाढ़ पीड़ितों के पैर खराब हो रहे हैं।