अमृतपुर। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के पास बहने से बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। करीब डेढ़ माह से पानी घरों में भरा होने से ग्रामीणों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। सौ से अधिक गांवों में संकट है। कई कच्चे मकान ढह गए हैं।
जिन घरों में पानी भरा है, उनके लोग सड़क और ऊंची जगहों पर शरण लेने को मजबूर हैं। पीड़ित खुले आसमान के नीचे रातें बिता रहे हैं। बाढ़ का असर किसानों पर सबसे अधिक पड़ा है। धान की फसल पूरी तरह डूब चुकी है, इससे रोजगार और खाने की समस्या विकराल हो गई है। घरों में रखा अनाज और गेहूं भी पानी से भीगकर सड़ गया। भोजन और साफ पानी की कमी से पीड़ित परिवारों के सामने दो वक्त का भोजन जुटाना चुनौती बन गया है।
गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी से आशा की मड़ैया, तीसराम की मड़ैया, रामपुर, जोगराजपुर, लायलपुर, बामियारी, अमीराबाद, कंचनपुर, सबलपुर, जगतपुर, कुबेरपुर बाढ़ से प्रभावित है। इसके साथ ही कुतुलूपुर, रतनपुर, माखन नगला, कलिका, रामप्रसाद, नागल, हमीरपुर, सोमवंशी बाढ़ से प्रभावित है। इमादपुर पमारान, हरिहरपुर पट्टी भरखा, चित्रकूट, अंबरपुर, सैदापुर, सुंदरपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, ऊगरपुर समेत करीब 100 गांव प्रभावित हुए हैं।
पानी से घिरे गांवों में नहीं पहुंच रहीं स्वास्थ्य टीमें
बाढ़ प्रभावित गांवों में सबसे बड़ी समस्या स्वास्थ्य सेवाओं की है। पानी से घिरे गांवों में सरकारी स्वास्थ्य टीमें नहीं पहुंच पा रही हैं। इससे बुखार और जुकाम से पीड़ित ग्रामीण झोलाछाप पर निर्भर हैं। दवाओं और पीने के साफ पानी की कमी ने स्थिति और गंभीर बना दी है। ग्रामीण प्रशासन से तत्काल राहत और चिकित्सा सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
फोटो-06,बाढ़ के पानी से गुजरते मंझा गांव के लोग।संवाद