गंगा और रामगंगा का जलस्तर घटने के बाद बाढ़ पीड़ितों की जिंदगी पुराने ढर्रे पर लौटने लगी है। बाढ़ पीड़ितों ने गांव पहुंचकर घरों में भोजन आदि बनाना शुरू कर दिया है। हालांकि अभी भी कई गांवों में सड़कें कटी होने से आवागमन में दिक्कत हो रही है।
रविवार को गंगा में 64 हजार और रामगंगा में करीब पांच हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। गंगा का जलस्तर 136.35 से 136.20 मीटर और रामगंगा का जलस्तर 135.70 से 135.50 मीटर पहुंच गया। दोनों नदियों का जलस्तर घटने से सुंदरपुर, चपरा, भुड़रा, ईमादपुर और पंखियन की मड़ैया आदि गांवों में ग्रामीण घरों में लौटने लगे हैं। इन गांवों में कीचड़ भरा था, वह भी धीरे-धीरे सूखने लगा है। ग्रामीणों ने घर में ही भोजन आदि बनाना शुरू कर दिया है।
हालांकि सुंदरपुर, नगला दुर्गू, सवितापुर, कछुआ गाढ़ा आदि गांवों की सड़कें कटी होने से अभी भी इन गांवों में नाव से आवागमन किया जा रहा है। ईमादपुर की सड़क कटने से दुपहिया वाहन ही मुश्किल निकल पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार पानी घटने से अब राहत मिलने लगी है।