फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फर्रुखाबादः सचिव को क्लीनचिट, बीडीओ पर लटकी निलंबन की तलवार

विज्ञापन
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। गोवंशों की तस्करी और गबन के आरोपों से घिरे सचिव को जांच कमेटी ने क्लीनचिट दी है, जबकि आरोप लगाने वाले तत्कालीन मोहम्मदाबाद बीडीओ को निलंबित करने की संस्तुति की गई है। बीडीओ का आरोप है कि सचिव की राजनीतिक पहुंच के कारण सीडीओ की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने आधी-अधूरी जांच की। उन्होंने जांच रिपोर्ट पर कई सवाल भी उठाए हैं।
विज्ञापन

मोहम्मदाबाद के खंड विकास अधिकारी रहे गोपीनाथ पाठक ने डीएम की गोद ली सितवनपुर पिथू गोशाला के प्रभारी रहे सचिव विनय कुमार सिंह पर गबन व 80 गोवंशों की तस्करी का आरोप लगाकर 29 अप्रैल 2022 को जांच रिपोर्ट डीडीओ को सौंपी थी। रिपोर्ट में कहा था कि सचिव मोहम्मदाबाद ब्लाक में 20 वर्ष तक तैनात रहे।
ग्राम पंचायत मानिकपुर कटिन्ना, मदनपुर, तेरा, निसाई, सितवनपुर पिथू से स्थानांतरण के बावजूद गबन की नियत से दूसरे सचिव को अभिलेख नहीं सौंपे। नवाबगंज की न्याय पंचायत भटासा में 16 मई 2017 से 11 जुलाई 2018 तक कार्य किया, स्थानांतरण के बाद सचिव किशनपाल को चार्ज नहीं दिया।
विज्ञापन

विनय कुमार सिंह पांच वर्ष तक मोहम्मदाबाद के प्रभारी एडीओ भी रहे। गोपीनाथ पाठक ने जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि विनय कुमार सिंह ने अपने परिवार की फर्म सूर्यांश इंटरप्राइजेज को ग्राम पंचायत बनकटी व हरसिंहपुर शाही में मनरेगा से निर्मित पंचायत घर के निर्माण में बिना टेंडर प्रक्रिया के तीन बार में पांच लाख 14 हजार 303 रुपये का भुगतान किया।
इसकी अवर अभियंता आरईडी बृजमोहन द्वारा जांच की गई तो बिना कार्य के फर्जी भुगतान की पुष्टि हुई थी। सफाई कर्मी से अपनी कार चलवाने में सचिव को सीडीओ ने तीन लाख 96 हजार रुपये रिकवरी का नोटिस दिया था। इसके अलावा, गोपीनाथ पाठक ने ग्राम पंचायत नंदसा व दाउदपुर नंदसा में बिना काम कराए 12.50 लाख रुपये का भुगतान एक फर्म को करने का आरोप सचिव पर लगाया था।
बीडीओ ने उठाए हैं यह सवाल
- तत्कालीन बीडीओ गोपीनाथ पाठक ने कमेटी की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि सचिव विनय कुमार सिंह की राजनीतिक पहुंच के चलते आरोपों की अधूरी जांच की गई।
- पशुधन सहभागिता में दिए गए गोवंश का टैग नंबर चेक किया जाए।
- यदि गोवंश गायब नहीं हैं तो सीडीओ ने गोवंश लेने वाले पशुपालकों पर रिकवरी के आदेश किस आधार पर किए।
- सीडीओ के सत्यापन में ही पशुपालकों के पास गोवंश नहीं मिले, तो आखिर कहां गए।
- यदि गोवंश मर गए तो उनका पोस्टमार्टम कब कराया गया और रिपोर्ट कहां है।
- यदि गोवंशों की तस्करी की पुष्टि नहीं हुई है तो कमेटी को गायब गोवंशों की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
इनसेट...
कमेटी की जांच में आरोप मिले गलत
तत्कालीन बीडीओ गोपीनाथ पाठक की जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने सीडीओ की अध्यक्षता में एडीएम व पीडी की कमेटी गठित कर जांच कराई। कमेटी ने गोशाला की जांच कर डीएम को रिपोर्ट सौंपी।
जांच अधिकारी एडीएम सुभाष चंद्र प्रजापति ने बताया कि गोशाला की 60 बीघा भूमि पर गेहूं की पैदावार, जनसहयोग से गोशाला में जमा हुए एक करोड़ दो लाख रुपये में 74 लाख रुये खर्च होने और 80 गोवंशों की तस्करी के संबंध में जांच की गई है। इसमें बीडीओ द्वारा सचिव पर लगाए गए आरोप गलत पाए गए।
तत्कालीन बीडीओ ने प्रशासन को बदनाम करने का किया प्रयास: डीएम
जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि बीडीओ गोपीनाथ पाठक ने गंभीर आरोप लगाकर प्रशासन को बदनाम करने का प्रयास किया। गोशाला की जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर झूठा आरोप लगाने में उन्होंने बीडीओ के खिलाफ निलंबन की संस्तुति कर शासन को रिपोर्ट भेज दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें