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एआरटीओ की जांच को पहुंचे एंटी करप्शन के दो इंस्पेक्टर

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फर्रुखाबाद। गत वर्ष तैनात एआरटीओ का ऑडियो वायरल होने और वकीलों की शिकायत पर शुरू हुई जांच करने के लिए एंटी करप्शन के दो इंस्पेक्टर सोमवार को पहुंचेे। उन्होंने एआरटीओ से मुलाकात की और तमाम सवालों के जवाब लिए। इसके बाद उन्होंने बाहर की फोटोग्राफी की, तो दलाल दुकानें बंद कर भाग निकले। दोनों जांच अधिकारी दफ्तर में करीब चार घंटे रहेे।
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वर्ष 2019 के जुलाई व अगस्त में यहां तैनात एआरटीओ सुदेश तिवारी ने मैनपुरी के कुसमरा के एक युवक का ट्रैक्टर बंद किया था। उस पर जिस एक्ट में कार्रवाई करनी चाहिए थी, उसमें करीब तीन लाख रुपये जुर्माना हो रहा था। बाद में एआरटीओ ने इस मामले में 1.26 लाख रुपये जुर्माना लगाया था। पीड़ित ने एआरटीओ से हुई लेन-देन की वार्ता का ऑडियो जारी कर दिया था।
इसी समय एआरटीओ सुदेश कुमार का वकीलों से विवाद हो गया, तो उन्होंने ऑडियो को लेकर शासन स्तर पर शिकायत की। यही नहीं यहां आए मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य से लिखित शिकायत की। शिकायत में दो दलालों के नाम भी शामिल किए गए थे। शासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया और जांच एंटी करप्शन को सौंप दी। एंटी करप्शन कानपुर शाखा के इंस्पेक्टर प्रदीप यादव और एसके सिंह सोमवार पूर्वाह्न 11 बजे एआरटीओ दफ्तर पहुंचे।
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उन्होंने यहां तैनात एआरटीओ शांतिभूषण पांडेय से करीब तीन घंटे तक बातचीत की। तमाम रिकार्ड भी तलब किए। इसके बाद दोनों अधिकारी बाहर निकले और उन्होंने दलालों के बारे में पूछताछ की। कुछ फोटो भी खींचे, तो आसपास मौजूद दलालों ने अपनी दुकानें बंद करनी शुरू कर दीं। अधिकारियों ने करीब चार घंटे एआरटीओ दफ्तर में बिताए। इससे कर्मचारियों में भी हड़कंप मचा रहा।
एआरटीओ शांतिभूषण तिवारी ने बताया कि दो जांच अधिकारी आए थे। उन्होंने पूर्व में तैनात सुदेश तिवारी के बारे में पत्रावलियों की जांच की। अफसरों का पूरा सहयोग किया जाएगा।
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