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झांसी के थाना सदर बाजार इंस्पेक्टर समेत चार पुलिस कर्मियों पर आयोग ने लगाया 10-10 हजार रुपये जुर्माना

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फर्रुखाबाद। छह वर्ष पहले शमसाबाद थाने में तैनाती के दौरान झांसी सदर बाजार के इंस्पेक्टर समेत चार पुलिसकर्मियों ने कार के फर्जी कागजात के आरोप में युवक को पकड़ लिया था। युवक के भाई ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में इसकी शिकायत की थी।
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आयोग की जांच में पुलिसकर्मियों के अकारण युवक को परेशान करने का मामला सामने आया। आयोग ने सभी पर दस-दस हजार रुपये जुर्माना किया है। उनको नोटिस जारी किए गए हैं। 15 दिन में जवाब न देने पर दस-दस हजार की बजाय 25-25 हजार रुपये सभी पुलिस कर्मियों के वेतन से वसूले जाएंगे। एसपी ने आयोग से आदेश के आधार पर झांसी के एसपी को पत्र भेजा है।
शमसाबाद थाना क्षेत्र के मोहल्ला दलमीर खां निवासी रीतेश कुमार भारद्वाज ने 21 दिसंबर 2014 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी। इसमें आरोप लगाया कि थाने में तैनात दरोगा नरेंद्र गौतम (वर्तमान में झांसी जिले के सदर बाजार थाने में इंस्पेक्टर), दरोगा इंद्रपाल सिंह (अब रिटायर), सिपाही जयनरायण (अब फर्रुखाबाद में यूपी 112 में ) और दीवान कमल किशोर (सदर कोतवाली की रेलवे रोड चौकी में तैनाती) ने छोटे भाई अवनीश कुमार को कार के फर्जी कागज होने का आरोप लगाकर पकड़ा और अकारण परेशान किया था।
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आयोग ने जांच करवाई, तो पुलिस कर्मी दोषी पाए गए। पुलिसकर्मियों ने बिना छानबीन के अवनीश को कार के कागज फर्जी बताकर पकड़ लिया था। उसे घंटों थाने में बैठाकर प्रताड़ित किया जबकि गाड़ी के कागज सही थे। आयोग ने इंस्पेक्टर समेेत चारों पुलिस कर्मियों को दस-दस हजार रुपये पीड़ित को देने का आदेश दिया है।
अकारण परेशान करने के संबंध में चारों को नोटिस जारी कर 15 दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। निर्धारित समय में स्पष्टीकरण न देने पर चारों के वेतन से 25-25 हजार रुपये की कटौती करने का आदेश एसपी को दिया है। एसपी डा. अनिल कुमार मिश्रा ने झांसी के एसपी को पत्र भेज दिया है। जिले में तैनात यूपी 112 व चौकी पर तैनात सिपाही को नोटिस का अनुपालन करने का आदेश दिया है।
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