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Farrukhabad News: पिता-पुत्र की हत्या व अपहरण में हिस्ट्रीशीटर सहित चार दोषी करार

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फर्रुखाबाद। 20 वर्ष पहले पुत्र का अपहरण कर ढाई लाख की फिरौती मांगने वाले हिस्ट्रीशीटर ने साथियों के साथ मिलकर पुत्र व पिता की हत्या कर दी थी। फिरौती की रकम को हड़पकर शव को गंगा में छिपा दिया था। कोर्ट ने गवाह व साक्ष्य के आधार पर हिस्ट्रीशीटर सहित चार को दोषी करार किया है। सजा सुनाने के लिए 22 अक्तूबर की तिथि नियत की है।
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फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला कर्नलगंज निवासी रूप कुमार कपूर ने 12 मार्च 2004 को गांव नगला दुर्गू निवासी हिस्ट्रीशीटर राममिस्टर यादव, मोहल्ला दालमंडी निवासी शरद दुबे उर्फ बालाजी, अजीत दुबे, नौकर मेवाराम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। इसमें बताया कि भाई बब्बू कपूर का पुत्र शिवम 18 दिसंबर 2003 को स्कूल में पढ़ने गया और वापस नहीं आया।
19 दिसंबर 2003 को पुलिस ने शिवम की गुमशुदगी दर्ज कर ली। राममिस्टर यादव, शरद दुबे उर्फ बाला जी, अजीत दुबे ने शिवम को जीवित छोड़ने के नाम पर ढाई लाख की फिरौती मांगी। बब्बू कपूर पुत्र को छुड़वाने के लिए ढाई लाख रुपये लेकर नौकर मेवाराम के साथ राममिस्टर के पास गए। इन लोगों ने भतीजे शिवम की पहले ही हत्या कर शव को गायब कर दिया था।
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भाई बब्बू की भी हत्या कर शव छिपा दिया। फिरौती के ढाई लाख रुपये भी हड़प लिए। विवेचक ने जांच की तो इसमें मोहम्मदाबाद कोतवाली के गांव नगला बहादुर निवासी बिजेंद्र कुमार, जनपद हरदोई थाना पाली गांव ढपरापुर निवासी गिरीश उर्फ बब्बा का नाम प्रकाश मेंं आया। मुकदमा दर्ज होने के बाद से नौकर मेवाराम का कोई सुराग नहीं लगा। मुकदमे की सुनवाई के दौरान शरद दुबे उर्फ बालाजी की मौत हो गई।
शुक्रवार को न्यायाधीश अनिल कुमार ने गवाह व साक्ष्य के आधार पर हिस्ट्रीशीटर राममिस्टर यादव, अजीत दुबे, बिजेंद्र सिंह व गिरीश उर्फ बब्बा को दोषी करार किया। सजा सुनाने के लिए 22 अक्तूबर की तिथि नियत की है।
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