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Farrukhabad News: समैचीपुर चितार के चार मकान गंगा में बहे

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शमसाबाद। गंगा में आई बाढ़ से समैचीपुर चितार गांव में कटान का कहर जारी है। शनिवार सुबह गांव के चार पक्के मकान गंगा में बह गए। इससे ग्रामीणों में दहशत है। ग्रामीण मकान खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। उनका कहना है कि सिंचाई विभाग द्वारा लगाए गए परकोपाइन भी कटान नहीं रोक पा रहे हैं।
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गांव समैचीपुर चितार में कई दिन से कटान हो रहा है। अब तक गांव के 22 से अधिक मकान व झोपड़ियां गंगा में समा चुकी हैं। ग्रामीण घरों से बैलगाड़ी में सामान भरकर रिश्तेदारी या किसी अन्य सुरिक्षत स्थान पर जा रहे हैं। शनिवार को गांव के शाहवान, अरमान, प्रमिला बानो व सोहेल के मकानों का आधे से अधिक हिस्सा कटकर गंगा में बह गया। बचा हुआ हिस्सा भी धीरे-धीरे कट रहा है। अकबन समेत अन्य ग्रामीणों का कहना है कि कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग ने गांव के सामने गंगा में परकोपाइन लगाई थी लेकिन कटान नहीं रुक सका।
सिंचाई विभाग के जेई सुखवंत सिंह राठौड़ ने बताया कि कटान बेहद तेज होने से अंतिम हिस्से में परकोपाइन के कुछ हिस्से प्रभावित हुए हैं। विभाग की ओर से बचाव कार्य जारी है। करीब 350 पिलर ट्रैक्टर से भेजे जा चुके हैं। उन्हें कटान वाले स्थानों पर लगाया जा रहा है। करीब 80 परकोपाइन सेट और भेजे गए हैं।
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गंगा का जलस्तर घटा, मुसीबतें बरकरार
फोटो-18 पंचायत घर अंबरपुर में भरा बाढ़ का पानी। संवाद
फोटो-19 नाव से जाते रामपुर के लोग। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतपुर। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 137.10 मीटर से 10 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। जलस्तर में कमी आने से ग्रामीणों को कुछ राहत की उम्मीद जगी है लेकिन बाढ़ की समस्याएं अभी खत्म नहीं हुई हैं। खेतों और रास्तों पर पानी भरा होने से आवागमन प्रभावित है। जलभराव से ग्रामीणों को घरों से बाहर निकलने के लिए नाव या अन्य साधनों का ही सहारा है।
नरौरा बांध से गंगा में शनिवार को 77,819 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बांध से पानी कम छोड़े जाने से गंगा का जलस्तर भी घटने लगा है। बाढ़ का पानी धीमी गति से कम हो रहा है। गांव में संपर्क मार्ग व घरों में अभी पानी कम नहीं हुआ है। फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग के चित्रकूट डिप पर तेज गति से पानी बह रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद कीचड़ और गंदगी की समस्या से जूझना पड़ेगा। संक्रामक बीमारियां फैलने का भी खतरा है। बाढ़ समाप्त होने के बाद भी पशुओं के चारे की समस्या बनी रहेगी। वहीं, रामगंगा का जलस्तर 135.80 मीटर पर स्थिर है। खो हरेली रामनगर बैराज से रामगंगा नदी में 5810 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
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