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12 गांवों में भरा बाढ़ का पानी

Tue, 14 Aug 2018 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद
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आशा मड़ैया में पानी से निकलते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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गंगा व रामगंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 136.60 से नीचे आ गया है। इससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। हालांकि अब भी एक दर्जन से ज्यादा गांवों में पानी भरा हुआ है। सबसे ज्यादा समस्या जानवरों के खानपान की हो रही है। तीसराम की मड़ैया जाने का रास्ता कटने से लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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मंगलवार को गंगा का जलस्तर घट कर 136.50 मीटर हो गया है। गंगा में मंगलवार को नरौरा बांध से 1 लाख 22 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। उधर, रामगंगा का जलस्तर लगातार दूसरे दिन तेजी से घटा है। सोमवार को जहां रामगंगा का जलस्तर घट कर 136.10 मीटर था, वहीं मंगलवार को 135.60 मीटर पहुंच गया। दो नदियों में चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर पर है। रामगंगा में मंगलवार को 12 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। हालांकि अब भी पट्टी भरखा, सुंदरपुर, कछुआ गाढ़ा, भुड़रा, ऊगरपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, नगला दुर्गू, आशा की मड़ैया, रामपुर, जोगराजपुर, जगतपुर आदि एक दर्जन से ज्यादा गांवों में अब भी बाढ़ का पानी भरा हुआ है।

तीसराम की मड़ैया जाने का रास्ता कट गया है। दरअसल तीसराम की मड़ैया की ओर जाने वाले रास्ते पर पीडब्ल्यूडी ने एक पुलिया का निर्माण कराया था। तब से ना ही पुलिया का झूला खोला गया, न ही पुलिया के दोनों ओर मिट्टी डाली गई थी। अब यह रोड कट गई है। अफसरों की लापरवाही से ग्रामीणों को नाव से जाना पड़ रहा है।  
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इतनी राहत सामग्री से क्या होगा
बाढ़ ग्रस्त गांव मंझा में अब भी पानी भरा हुआ है। ग्रामीण संतोष कुमार, वेदराम, सर्वेश, पप्पू, राम नरेश, विश्राम, जोगेंद्र आदि ने बताया कि जितनी राहत सामग्री शासन की ओर से दी जा रही है। इससे क्या होगा। हम लोग दो से तीन दिन गुजारा कर सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मई में गांव में आग लगी थी तब ही घर में रखा सब राशन जल गया था। अब तो घरों में कुछ भी नहीं है।
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