फर्रुखाबाद। जमीन की रंजिश में बालक के अपहरण के दोषी को विशेष न्यायाधीश एससीएसटी महेंद्र सिंह ने पांच वर्ष की सजा सुनाई है। दोषी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। न देने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भोगने के आदेश दिए।
जनपद शाहजहांपुर थाना मिर्जापुर गांव तारापुर निवासी सुखराम की पत्नी सुशीला 11 वर्ष के पुत्र सुधीर कुमार के साथ ससुराल में आई थी। 15 मार्च 1998 की शाम सुधीर कुमार लापता हो गया। घटना के बाद से ही चचेरा साला नन्हे लाल भी गायब हो गया। सुखराम ने नन्हे लाल की बिना मर्जी के सोहन से ढाई बीघा जमीन खरीद ली थी।
इसी रंजिश में नन्हे लाल व उसके साथियों ने सुधीर का अपहरण कर लिया। पुलिस ने सुखराम की तहरीर पर अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया। विवेचक ने मुकदमे में थाना मिर्जापुर गांव पहरूआ निवासी नेत्रपाल, नन्हे लाल, नरेंद्र सिंह, सोहन के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। पुलिस ने मुठभेड़ में आरोपियों को गिरफ्तार कर अपहृत सुधीर को खोज लिया था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान नन्हे लाल व सोहन की मौत हो गई। नरेंद्र की फाइल मुकदमे से अलग कर दी गई। मुकदमे की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश ने अपहरण में नेत्रपाल को पांच वर्ष की सजा सुनाई। मुठभेड़ में भी नेत्रपाल को पांच वर्ष की सजा सुनाई। 15 हजार रुपये का जुर्माना जमा करने के आदेश दिए। जुर्माना नहीं देने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।